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झंझावात-क्या है इसके पीछे का विज्ञान?

आए दिन हम अखबारों में झंझावात (थंडरस्टॉर्म), बिजली गिरने से लोगों की मौत जैसी खबरें पढ़ते हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली गिरने से होने वाली मौत की कुछ ज्यादा ही खबरें आती हैं। क्या आप जानते हैं कि जमीन पर ये बिजलियां कैसे गिरती हैं और इसके पीछे का विज्ञान क्या है? झंझावात के विज्ञान को समझने के लिए हमें बिजली गिरने व गर्जन के विज्ञान को समझना होगा। आईए जानते हैं इसके पीछे के विज्ञान कोः
दरअसल, झंझा बादलों (स्टॉर्म क्लाउड) की ऊर्ध्वाधर वायु पानी की छोटी बूंदे व आईस क्रिस्टल के साथ उपर उठती है, तो दूसरी ओर अपेक्षाकृत घना नर्म ओला (hail) नीचे गिरता है। जब ये आपस में टकराते हैं तब आईस क्रिस्टल धन आवेशित हो जाता है वहीं नर्म ओला ऋण आवेशित हो जाता है। परिमाणस्वरूप बादल का उपरी हिस्सा जहां धन आवेशित हो जाता है वहीं इसका आधार यानी निचला हिस्सा ऋण आवेशित होने लगता है।
बादल का ऋण आवेशित आधर इलेक्ट्रॉन को जमीन की ओर उन्मुख कर देता है। इस तरह बादल से जमीन पर बिजली गिरने का एक स्रोत यह है। बिजली के अन्य प्रकार भी बादलों में आवेश का अंतर ही है।
गर्जन
गर्जन (Thunder) के पीछे भी बिजली यानी लाइटनिंग कारक काम करती है। आकाशीय बिजली जिस होकर गुजरती है वहां के वायु चैनल का तापमान 30,000 डिग्री सेल्सियस हो जाता है। स्पष्टतः आकाशीय बिजली के कारण पहले आसपास की वायु तेजी से गर्म हो जाती है और फैल जाती है, लेकिन इसके पश्चात शीतल व संकुचित भी हो जाती है। यही परिघटना सोनिक शॉक वेव-गर्जन को जन्म देती है। गर्जन की गति 343 मीटर प्रति सेकेंड होती है।
आकाशीय बिजली का रसायन
आकाशीय बिजली के रसायन के तहत वर्षा पूर्व गंध्, बिजली के रंग एवं नाइट्रेट की बात करते हैं। दरअसल, आकाशीय बिजली (Lightning) हवा में द्विपरमाणुक ऑक्सीजन को एकल ऑक्सीजन परमाणु में विभाजित कर सकती है। ऑक्सीजन के अन्य अणुओं के साथ मिलकर यह एकल ऑक्सीजन ओजोन का रूप ले लेता है, जो ‘वर्षा पूर्व गंध् को जन्म देता है।
बिजली के रंग के पीछे का भी अपना रसायन है। बिजली अपने मार्ग में पवन अणुओं को आयनीकृत करती रहती है। बिजली का नीला-बैंगनी रंग वस्तुतः संदिप्त नाइट्रोजन एवं हाइड्रोजन परमाणुओं से उत्सर्जित प्रकाश का परिणाम है।
उच्च तापमान पर बिजली सृजित होती है और नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन जुड़कर नाइट्रोजन ऑक्साइड का रूप ले लेता है। वर्षा में यह घुलित हो जाता है और नाइट्रेट का निर्माण करता है जो कि पौधें के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

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