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डब्ल्यू.एम. केक वेधशाला से बिग बैंग के समय के अवशेष की खोज

खगोलविदों ने बिग बैंग के पश्चात बेसहारा हो गए गैस के बादल का अवशेष सुदूर ब्रह्मांड में खोजा है। साइंस डेली के मुताबिक इसे विश्व का सबसे शक्तिशाली ऑप्टिकल टेलीस्कोप ‘डब्ल्यू.एम.केक वेधशाला’ के द्वारा खोजा गया है। यह वेधशाला हवाई स्थित मौनाकी में स्थित है। उपर्युक्त गैस का पता वेधशाला के इएसआई एवं हाइरेस उपकरणों से की गई है।

इसकी खोज स्वाइनबर्न यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के पीएचडी छात्र फ्रेड रॉबर्ट एवं प्रोफेसर माइकल मरफी ने वेधशाला प्रेक्षण के पश्चात किया। शोधकर्त्ताओं के मुताबिक इस खोज से यह जानने में मदद मिलेगी कि हमारे ब्रह्मांड के प्रथम आकाशगंगाओं का निर्माण कैसे हुआ। शोधकर्त्ता फ्रेड रॉबर्ट के अनुसार जहां भी हम देखते हैं ब्रह्मांड का गैस विस्फोट हुए तारों के भारी धातुओं के मलबों से प्रदूषित दिखता है। परंतु गैस के जिस बादल को वेधशाला ने खोजा है बिल्कुल शुद्ध व अप्रदूषित प्रतीत होता है। बिग बैंग के 1.5 अरब वर्षों के पश्चात भी तारों से यह प्रदूषित नहीं हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि बिग बैंग का वास्तविक अवशेष है।

अंतरिक्ष में जीवाष्म के अवशेष की खोज कैसे होती है?

हमारा ब्रह्मांड लगभग 13.8 अरब वर्ष पुराना है। इस अवधि में कई तारों का जन्म हुआ और कई तारें मर भी गए। किसी तारा की समाप्ति के पश्चात कई बार बड़ा विस्फोट होता है और सुपरनोवा का निर्माण होता है। विशाल विस्फोट से भारी धातुओं का कचरा अंतरिक्ष में फैल जाता है। इससे जब भी खगोलविद् अंतरिक्ष में देखते हैं तब उन्हें दप धातुओं से भरा गैस का बादल दिखता है। विगत 13.7 अरब वर्षों में कई तारों का विस्फोट हुआ है, ऐसे में बादलों में कचरा भरा पड़ा है। इन गैस बादलों के परीक्षण से वैज्ञानिक हमारे ब्रह्मांड की आरंभिक घटनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। किसी गैस का बादल के इन कचरों से मुक्त होने का मतलब है कि वह ब्रह्मांड की शुरूआत के समय का है। एक ऐसे ही गैस के बादल की खोज का दावा किया गया है और जिस गैस के बादल को खोजा गया है वह बिल्कुल शुद्ध है।  हालांकि इससे पहले दो ओर जीवाष्म बादलों की खोज 2011 में की गई थी और इन दोनों की खोज आकस्मिक तौर पर की गई थी।

शोध से जुड़े प्रोफेसर मर्फी के मुताबिक उनका प्रयास ब्रह्मांड में प्रथम तारों के अवशेष की खोज रहा है। प्रथम तारों का अवशेष लगभग विशुद्ध होता है अर्थात उसमें भी भारी धातुओं का हल्के मलबे होते जरूरत हैं। परंतु अभी जिस अवशेष की खोज की गई है वह बिल्कुल शुद्ध है।

हालांकि उपर्युक्त तर्क के कुछ विपरीत तर्क भी कई खगोलविदों ने दिए हैं। एक तर्क यह है कि गैस का यह विशुद्ध बादल कभी प्रथम तारों के आंशिक अवशेष से प्रदूषित हुआ होगा जिसके कारण इसमें आंशिक तौर पर भारी धातु मौजूद हो जिसे टेलीस्कोप ने पकड़ा नहीं होगा। एक अन्य तर्क यह है कि गैस का यह बादल पहली बार किसी आकाशगंगा से होकर गुजर रहा है इसलिए इसे किसी तारा से प्रदूषित होना अभी शेष है। बहरहाल इस पर और शोध की जरूरत है जिससे कि ब्रह्मांड के आरंभिक रहस्यों को अच्छी तरह से जाना जा सके।

क्या है बिग बैंग?

नासा के मुताबिक महान खगलोविद् जॉर्ज लेमैत्रे ने 1927 में बताया कि इस ब्रह्मांड की शुरुआत एकल बिंदु से हुआ था। बाद में इसका विस्तार होता गया और मौजूदा रूप में आया। इसके दो वर्षों के बाद एडविन हब्बल ने यह पाया कि कई आकाशगंगाए हमसे दूर जा रही हैं। उन्होंने यह भी देखा कि दूर वाली आकाशगंगा नजदीकी आकाशगंगा से तेज गति से दूर जा रही है। इसका मतलब यह था कि ब्रह्मांड अभी भी विस्तृत हो रही है जैसा कि लेमैत्रे ने बताया था। यह चीजें दूर जा रही हैं तो ये कभी एक साथ रहे भी होंगे।

वस्तुतः जब ब्रह्मांड की शुरूआत हुई तब यह गर्म व ऊर्जा तथा प्रकाश के छोटे-छोटे कणों का मिश्रण था। जैसे-जैसे इसका विस्तार हुआ, यह अधिक जगह लेता गया और ठंडा भी होता गया।

छोटे-छोटे कणों से परमाणुओं का निर्माण हुआ। बाद में इन्हीं परमाणुओं ने मिलकर तारों एवं आकाशगंगाओं का निर्माण किया। प्रथम तारों ने बड़े परमाणुओं का निर्माण किया और परमाणुओं का समूह मोलेक्युल्स कहलाए। इससे और तारों का निर्माण हुआ। इसी के साथ आकाशगंगाएं भी टकरा रही थीं और एक साथ हो रही थीं। नए तारों के जन्म होने व मरने से क्षुद्रग्रह, धूमकेतुओं, ग्रहों एवं ब्लैक होल्स का निर्माण होता गया। इस तरह विगत 13.8 अरब वर्षों में यह सब घटित हुआ। इसका मतलब यह है कि हमारा ब्रह्मांड 13.8 अरब वर्ष पुराना है।

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