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बागजान गैस कुंआ में आगः क्यों-कैसे?

असम में ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) के प्राकृतिक गैस कुंआ में ब्लोआउट के पश्चात लगी आग ने दो लोगों की जानें ली ली है, कई लोगों को आसपास के गांव से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और आसपास के पर्यावरण व वन्यजीवों पर इसका जो नुकसान हुआ है वह अलग है। आग इतनी भयानक लगी है कि इसे 30 किलोमीटर दूर से देखा जा सकता है। यह घटनाक्रम सामने आने के पश्चात भारत में इस तरह की आपदा से निपटने की क्षमता पर सवाल उठाये जा रहे है, खासकर विदेशी तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता लेने की वजह से।

क्या है पूरा मामला?

असम के तिनसुकिया जिला में ऑयल इंडिया लिमिटेड का बागजान (Baghjan) में प्राकृतिक गैस कुंआ स्थित है। इस कुंआ से प्रतिदिन लगभग 80,000 स्टैंडर्ड क्युबिक मीटर प्राकृतिक गैस निकाला जाता है। प्राकृतिक गैस भंडार के दृष्टिकोण से ऑयल इंडिया लिमिटेड के अधीन यह महत्वपूर्ण कुंआ है। विगत 27 मई, 2020 को बागजान-5 से प्राकृतिक गैस का रिसाव होना आरंभ हुआ, जिसे ब्लोआउट की संज्ञा दी गई। निरंतर निकल रहे गैस में आग लगने से रोकने के लिए ऑयल इंडिया लिमिटेड, जिसका यह तेल कुंआ है और जिसके ऑपरेशन का भार निजी सेक्टर की कंपनी जॉन इनर्जी लिमिटेड को दिया गया है, उस क्षेत्र के ऊपर पानी का छिड़काव के द्वारा ‘जल छतरी’ यानी वाटर अम्ब्रेला का निर्माण कर रहा था। परंतु 14 दिनों तक चले रिसाव के पश्चात 9 जून को इसमें बड़ा विस्फोट हुआ और फिर आग लग गई। उस दिन आसपास के उच्च तापमान व शुष्क मौसम के समक्ष जल छतरी नाकाफी सिद्ध हुयी। फिर क्या था, इसका दुष्प्रभाव आसपास दिखने लगा।

ब्लोआउट नियंत्रण में असफलता

प्राकृतिक गैस कुंआ में ब्लोआउट कैसे हुआ, इस पर दो तरह की राय मीडिया में आयी है। एक पक्ष कंपनी के कर्मचारियों का है। उनके मुताबिक क्षतिग्रस्त स्पूल को बदलने के लिए ‘ब्लो आउट प्रिवेंटर’ (बीओपी) हटा दिया। यह भी कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है बल्कि रूटीन स्तर पर ऐसा किया जाता है। जब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में थी तभी गैस ने धक्का दिया और फिर ब्लोआउट हुआ। वहीं विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लोआउट की दुर्घटना को टाला जा सकता है यदि कुंआ से प्राप्त आरंभिक संकेत को समय पर पढ़ लिया जाता है। जब ब्लोआउट होता है तब कुंआ दबाव संबंधी कुछ संकेत भी देता है। यदि इसे पढ़ने में चूक हो गयी तो फिर इसे रोकना मुश्किल हो जाता है। स्पष्ट है कि चूक तो हुयी है, और इसे पता लगाना जरूरी है, परंतु तात्कालिक तौर पर तो इस आग पर पूरी तरह काबू करना पहली प्राथमिकता है।

ऐसा प्रतीत होता है कि, ऑयल इंडिया लिमिटेड जो यहां से प्राकृतिक गैस निकालता है, के पास इस तरह की आपदा (ब्लोआउट) से निपटने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव है। सिंगापुर की कंपनी अलर्ट डिजास्टर कंट्रोल के विशेषज्ञों को इसके लिए बुलाया गया। आश्चर्य यह है कि विगत कई दशकों में भारत में इस तरह की कई दुर्घटनाओं के बाद भी इस तरह की आपदा से निपटने के लिए न तो त्वरित उपाय मौजूद है न ही स्थानीय स्तर पर तकनीकी विशेषता हासिल की गई है। असम में ही इस तरह की दो दुर्घटनाएं स्मरण में आती हैं। 1970 के दशक में ओएनजीसी के स्वामित्व वाले रूद्रसागर तेल कुंआ में लगी आग को बुझाने में लगभग तीन महीने लगे थे। वर्ष 2005 में ऑयल इंडिया लिमिटेड के ही दायखोम स्थित तेल कुंआ में भी इसी तरह आग लगी थी। असम के बाहर अक्टूबर 2009 में जयपुर स्थित इंडियन ऑयल के टर्मिनल में आग लगी थी। इस घटना के पश्चात एम.बीलाल कमेटी का गठन किया गया। तेल कंपनियों द्वारा अनुपालन किये जाने वाले कई सुझाव इस कमेटी द्वारा दिये गये। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार इसकी अधिकांश सिफारिशों को मान लिया गया। परंतु मौजूदा हादसा को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि या तो इसकी सिफारिशें कागज तक ही सीमित रह गईं या फिर क्रियान्वयन नहीं हो पाया।

पर्यावरण पर प्रभाव

ऑयल इंडिया लिमिटेड का बागजान प्राकृतिक गैस कुंआ जैव विविधता समृद्ध ‘डिब्रु-साइखोवा नेशनल पार्क’ से लगभग 900 मीटर की दूरी पर है। इस तेल कुंआ के पास मागुरी-मोतापुंग आद्रभूमि भी है। दोनों संरक्षित क्षेत्रों में काफी वन्यजीव पाये जाते हैं। हालांकि प्राकृतिक गैस कुंआ इको सेंसिटिव जोन में नहीं आता परंतु गैस हवा में संघनित होकर फैल रहा है इसलिए इसके प्रकोप में राष्ट्रीय उद्यान एवं आद्रभूमि का आना स्वाभाविक है। वाइल्ड ट्रायल्स के मुताबिक 31 मई, 2020 को एक नदी डॉल्फिन इसका शिकार हुआ। इसके अलावा कई पक्षियों एवं उड़ने वाली गिलहरी भी इसकी चपेट में आ गया।

यह विडंबना ही है कि जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्र जीवाष्म ईंधन जैसे प्राकृतिक संसाधनों से भी समृद्ध होते हैं। जैव विविधता की शर्तों पर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बेलगाम होता रहा है। ऐसे समय में पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन जैसे कानून महज कागजी एक्ट ही नजर आते हैं। अपेक्षा की जाती है कि बागजान प्राकृतिक गैस कुंआ में लगी आग से सीख लेकर सरकार कोई कदम उठाए।

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