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सरकार ने 18 कीटनाशकों को प्रतिबंधित किया

अनुपम वर्मा कमेटी द्वारा सिफारिशें सौंपने के दो वर्षों के पश्चात केंद्र सरकार ने अंततः भारत में प्रयुक्त हो रहे 18 कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके लिए कीटनाशक (रोक) आदेश 2018 की अधिसूचना जारी की गई। इनमें से 12 कीटनाशकों पर प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से यानी 9 अगस्त, 2018 को लागू हो गया जबकि शेष 6 कीटनाशकों पर प्रतिबंध 31 दिसंबर, 2020 से लागू होगा। इनमें से सात ऐसे कीटनाशक हैं जो भारत में प्रयुक्त विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा श्रेणीबद्ध क्लास-1 (अत्यधिक विषाक्तता) के 18 कीटनाशकों में शामिल हैं।  भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार कोई भी व्यक्ति इन 12 कीटनाशकों का निर्माण, आयात, सूत्रीकरण या परिवहन नहीं करेगा न ही इसे बेचेगा और न ही इसका प्रयोग करेगा। यदि कोई व्यक्ति तीन महीनों के भीतर इन कीटनाशकों के लिए निर्माण, आयात, परिहवन, सूत्रीकरण, बेचने के लिए प्राप्त प्रमाणपत्र नहीं लौटाता है तो उसके खिलाफ कीटनाशक एक्ट 1968 के तहत कार्रवाई की जाएगी। छह अन्य कीटनाशकों (जिन पर 31 दिसंबर, 2020 से प्रतिबंध लगेगा) के मामले में सरकार ने 1 जनवरी 2019 से लाइसेंस जारी करना बंद कर देगी।

जिन 12 कीटनाशकों पर 9 अगस्त, 2018 से प्रतिबंध लागू हो गया, वे हैंः  बेनोमील, कार्बाराइल, डियाजिनॉन, फेनारिमॉल, फेंथियोन, लिनुरॉन, मेथोक्सी इथाइल मर्करी क्लोराइड, मिथाइल पैराथियोन, सोडियम साइनाइड, थियोमोटॉन, ट्राइडेमॉर्फ एवं ट्राइफ्लुरेलिन।

जिन 6 कीटनाशकों पर 31 दिसंबर, 2020 से प्रतिबंध प्रभावी होगा, वे हैंः अलाक्लोर, डाइक्लोरवोस, फोरेट, फॉसफेमिडॉन, ट्रियोजोफोस।

ज्ञातव्य है कि केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय ने कीटनाशकों की समीक्षा के लिए जुलाई 2013 में अनुपम वर्मा कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने कुल 66 कीटनाशकों की समीक्षा की और इनमें से 18 कीटनाशकों को प्रतिबंधित करने की सिफारिश की। इस कमेटी की सिफारिशों पर विचार करने के लिए डॉ.जे.एस. संधु कमेटी का गठन किया। इसी के पश्चात यह प्रतिबंध लगाया गया है। जिन 66 कीटनाशकों की समीक्षा अनुपम वर्मा कमेटी द्वारा की गई उसे एक या अधिक देशों में या तो प्रतिबंधित कर दिया गया है या उसके प्रयोग को सीमित कर दिया गया है। परंतु भारत में अभी भी इनका प्रयोग होता रहा है।

कमेटी ने जिन 66 कीटनाशकों पर विचार किया उनमें से 18 को प्रतिबंधित करने की सिफारिश की। अन्य 18 के प्रयोग को जारी रखने को कहा। यानी उसे खतरनाक नहीं माना गया। वहीं 27 अन्य कीटनाशकों की बाद में पुनर्समीक्षा की जाएगी। इन 66 कीटनाशकों में से 2 को पहले ही प्रतिबंधित कर दिया गया। केवल एक कीटनाशक एंडोसल्फान की समीक्षा नहीं की गई क्योंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसे निम्नलिखित तरीके से समझा जा सकता हैः

पहले से प्रतिबंधः  2

प्रतिबंध की सिफारिशः       18

बाद में पुनर्समीक्षाः             27

प्रयोग जारी रखनाः             18

समीक्षा नहींः                      1

विचाराधीन कीटनाशकों की संख्या 66

पर कई लोग केवल 18 कीटनाशकों पर प्रतिबंध से खुश नहीं हैं। महाराष्ट्र के यावतमल क्षेत्र में वर्ष 2017 में गलती से कीटनाशकों के उपभोग के कारण 21 किसानों व कृषि मजदूरों की मौत हो गई थी। महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने इस मौत के लिए मोनोक्रोटोफोस नामक कीटनाशक को जिम्मेदार ठहराया था और इसको प्रतिबंधित करने की सिफारिश की थी। बिहार के छपरा जिला के एक स्कूल में 16 जुलाई, 2013 को मध्याह्न भोजन करने के पश्चात 23 बच्चों की मौत के लिए भी इसी कीटनाशक को जिम्मेदार ठहराया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस कीटनाशक को विषाक्तता की उच्चतर श्रेणी ‘क्लास-1बी’ में शामिल किया है। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने जिन 18 कीटनाशकों को प्रतिबंधित किया है उनमें मोनोक्रोटोफोस कीटनाशक शामिल नहीं है। भारत में कुल 104 कीटनाशकों का प्रयोग हो रहा है परंतु अन्य देशों में ये प्रतिबंधित हैं। वहीं समिति ने केवल 66 कीटनाशकों की ही समीक्षा की। सर्वोच्च न्यायालय में इन 104 कीटनाशकों की समीक्षा के लिए याचिका भी दायर की गई। परंतु न्यायालय ने याचिका दायर करने वालों को जे.एस. संधु कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखने को कहा। चूंकि सरकार ने 18 कीटनाशकों पर ही प्रतिबंध लागू किया गया है, ऐसे में कहा जा सकता है कि इस कमेटी ने भी केवल 18 पर ही विचार किया। इसके बावजूद सरकार के मौजूदा निर्णय का स्वागत किया जाना चाहिए। कम से कम प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया की शुरूआत तो हो चुकी है।

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