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आईएचबीटी ने विकसित की उत्तम गुणवत्ता की हर्बल चाय

सीएसआईआर-आईएचबीटी द्वारा उत्तम स्वास्थ्य वर्द्धक पेय के तौर पर हर्बल चाय निर्माण की विधि विकसित की गई है। संस्थान द्वारा विकसित हर्बल चाय को विशेष गुणवत्ता वाले औषधीय एवं सुगंधित पौधों की पत्तियों, फूलों तथा फलों के अर्क के मिश्रण से तैयार किया जाता है। वर्षा ऋतु में सामान्य चाय की गुणवत्ता प्रभावित हो जाती है लेकिन हर्बल चाय की गुणवत्ता मौसम के असर से अप्रभावित रहती है।

हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएचबीटी) जो हिमाचल प्रदेश के पालमपुर जिला में स्थित है, इसके द्वारा हर्बल चाय निर्माण की उन्नत विधि के विकास का उद्देश्य है कि चाय की कम गुणवत्ता युक्त पत्तियों का मूल्यवर्द्धन कांगड़ा घाटी के औषधीय गुणवत्ता वाले स्थानीय सगंध पौधों का उपयोग करके, स्वाद व सुगंध में वृद्धि के माध्यम से किया जाये।

संस्थान द्वारा चाय और हर्बल उत्पादों में आर्गनोक्लोरीन्स, कार्बोफ्यूरान और मोनोक्रोटोफोस के निर्धारण के लिए तरल व तरल निष्कर्षण पद्धति और जीएस (GS) के उपयोग की बहु-यंत्रीय विधि विकसित और वैध है। सर्दी के मौसम में चाय की झाड़ियां निष्क्रिय और अनउत्पादक हो जाती हैं। वर्षा ऋतु में चाय पत्तियों को सुखाकर निर्मित किये गये दानों में नमी का प्रवेश हो जाता है, अतः इनकी गुणवत्ता पर असर पड़ता है और इनका उपयोग कर, पीने के लिए तैयार की गई चाय का स्वाद अच्छा नहीं होता तथा यह स्वास्थ्यवर्द्धक भी नहीं रह जाती। वहीं, हर्बल चाय में मौसमी असर से कोई दोष उत्पन्न नहीं होता और स्वादिष्ट होने के साथ-साथ यह स्वास्थ्य वर्द्धक भी होती है।

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