भूगोल और आप

जलवायु परिवर्तन के मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव

संसार के बहुत से भागों मेंए विशेषकर तापमान में हो रही निरंतर वृद्धि ने शारीरिक और जैविकीय व्यवस्थाओं के विभिन्न ढंगों को तरह.तरह से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मनुष्य के कार्यों का नकारात्मक प्रभाव आने वाली पीढ़ी पर निश्चित रूप से पड़ेगा। वायुमण्डल में ग्रीन हाउस गैसोंए विशेषकरए कार्बन डाईआक्साइड और मीथेन के जमाव में बढ़ोतरी होती जा रही है। 1850 के दशक सेए जब से तापमान का रिकॉर्ड (दर्ज)...

भूगोल और आप

इलैक्ट्रानिक कचरे का उचित प्रबंधन जरूरी है

सूचना प्रौद्योगिकी में आयी क्रांति ने कई मायने में सारी दुनिया की तस्वीर ही बदल दी है। यह प्रौद्योगिकी संचारए मनोरंजनए स्वास्थ्यए शिक्षा जैसे अनेकों क्षेत्रों में मानव हित  के लिये वरदान सिद्ध हुई है। इस प्रौद्योगिकी के सहारे आज सुख सुविधा तथा सम्पन्नता की नई इबारतें लिखी जा रही हैं। जहाँ एक ओर सूचना प्रौद्योगिकी में इस्तेमाल किये जाने वाले विभिन्न उपकरणों में सुधार कर नित नये...

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पर्यावरणीय पारितन्त्र और मानवीय क्रिया

मानवीय हस्तक्षेप, पारिस्थितिकी प्रणालियों और पारिस्थितिकी सेवाओं जो आवश्यक रूप से जन कल्पना के दायरे में नहीं आते, के अधीन पारस्परिक अंतः निर्भरता को प्रभावित करता है। मानवीय क्रिया के संदर्भ में पर्यावरणीय पारितन्त्र की संपोषणीयता को समझने के लिए सूक्ष्म संबंधों को समझना जरूरी है। पारितन्त्रों के अन्तर्गत अपनी अन्तः निर्भरता को मानवीय हस्तक्षेप प्रभावित करते हैं और यह आवश्यक...

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जलवायु परिवर्तन रोकने को घटे कार्बन की मात्रा

वैश्विक मंचों पर भारी प्रयास किए जाने के बावजूद कार्बन डाई-ऑक्साइड पैदा होने की घटना को विनियमित किए जाने के मुद्दे का समाधान नहीं हो पाया है। कार्बन की मात्रा घटाने और आर्थिक विकास के बीच के द्वंद ने बहस को और अधिक जटिल बना दिया है। इस लेख में कार्बन डाई-ऑक्साइड को जमीन के नीचे गहरा दबा देने की संभावना सहित इसके पैदा होने की मात्रा को घटाने की क्रियाविधियों के रूप में कई विकल्प सुझाए...

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गेहूँ की बर्बादी रोकनी ही होगी

गेहूँ शीतोष्ण कटिबन्ध का सबसे महत्त्वपूर्ण अनाज है। चीन में इसकी खेती 5000 और भारत में 4000 वर्ष पूर्व से की जा रही है। मोहन जोदड़ो में की गयी खुदाई में जो गेहूँ के दाने मिले हैं उनके अध्ययन के आधार पर इतिहासकारों का मत है कि भारत ही सम्भवतः गेहूँ का आदि स्थान रहा है। वेदों में भी चावल जौ तिल मूंग के साथ गेहूँ का वर्णन मिलता है। कुछ विद्वानों के अनुसार गेहूँ प्रारम्भ में सागरीय प्रदेशों - टर्की,...

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वीडल सील द्वारा चुम्बकीय क्षेत्र का जीपीएस रूप में प्रयोग

वीडल सील मछलियों में एक प्रकार का जैविक अनुकूलन करने की क्षमता होती है जिससे वे समुद्र की गहराई तक गोता लगा सकती हैं। साथ ही उनमें एक अनोखी योग्यता भी होती है जिससे सीलें बर्फीली सतहों में भी अपनी जरूरत के अनुसार छिद्र तलाश लेती हैं और इन छिद्रों  को सांस लेने के लिए उपयोग करती हैं। शोधकर्ता मानते हैं कि वीडल सील मछलियां पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को प्राकृतिक जीपीएस के रूप में प्रयोग...

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रोकें गुर्दे में पत्थर का बनना

गुर्दे में पत्थर होना बड़ा ही तकलीफदेह होता है, पर मूत्राशय संबंधी रोगों में सबसे आम रोग यही है। गुर्दे में मौजूद पत्थर सामान्यतः बिना किसी चिकित्सीय हस्तक्षेप के बाहर निकल जाते हैं। आमतौर पर मूत्र में ऐसे रसायन मौजूद होते हैं जो पत्थर बनने की प्रक्रिया को रोकते हैं अथवा उसमें रूकावट बनते हैं। ये रसायन कभी.कभी कारगर नहीं हो पाते हैं, इस प्रकार कुछ लोगों में पत्थर बन जाता है। जबकि पित्ताशय...

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अपनी रक्षा स्वयं करें हृदयाघात के दौरान

मान लीजिए शाम के सवा छह बजे हैं और आप दिन भर कड़ा परिश्रम करने के बाद वाहन अकेले चलाकर घर लौट रहे हैं। वास्तव में आप थक गए हैं तथा तनाव से भरे हुए हैं। अचानक आप अपनी छाती में तेज दर्द का अनुभव करते हैं जो आपके बांह और आपकी जबड़े तक फैल जाता है। आप अपने नजदीकी अस्पताल से कुछ ही पर हो सकते हैं लेकिन दुर्भाग्यवश आपको यह नहीं पता कि आप उतनी दूर तक पहुंच पायेंगे या नहीं। आपको कार्डियोपलमोनरी रिसस्टीशन...

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सेहत के लिए नुकसान दायक है नाश्ते से परहेज

नाश्ते से आघात, हृदयघात और अचानक होने वाली मृत्यु को रोकने में मदद मिलती है। जो लोग हमेशा ही ना नाश्ते  करने से परहेज रखते हैं, उन्हें इस आदत को अभी से छोड़ देना चाहिए। आप ने बड़ों-बुढ़ों को हमेशा यह कहते सुना होगा कि ‘नाश्ता दिन का सबसे महत्वपूर्ण खाना होता है’, हाल के शोधों   से इस बात की पुष्टि हुई है कि नाश्ते से परहेज रखना खराब आदतों में से एक है क्यों । कि हृदयाघात और आघात की अधिकतर घटनाएं...

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भारत में शरणार्थी समस्या : एक अकल्पित आघात

विविधतापूर्ण संस्कृति वाला भारत एक ऐसा देश है जो अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करते हुए अपनी विभिन्न प्रकार की संस्कृतियों की रक्षा वर्षों से करता आ रहा है। कालक्रम के अनेक खण्डों में भारत की संस्कृति, सभ्यता और जीवनशैली पर अनेक प्रकार के आघात हुए हैं। विदेशी आक्रमण के कारण भारत ने अनेक बार कुठाराघात सहा है। भारत में शरणार्थी समस्या परन्तु भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के समय से...