भूगोल और आप

अनुसंधान में भौगोलिक आयाम को जोड़ना होगा

पृथ्वी पर मौजूद सभी प्रणालियों को संगठित किया जा रहा है और समेकित अध्ययन जिनमें वातावरण, भूगर्भमंडल, जैवमंडल शामिल हैं, के अध्ययनों को समेकित करके सभी को एक साथ रखा जाता है। इसलिए पृथ्वी प्रणाली विज्ञान का समेकित अध्ययन किए जाने की नई प्रवृत्ति सामने आयी है। तैयार किए जा रहे भौगोलिक डाटा से भी इस समेकन में मदद मिलेगी तथा अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। क्षेत्रीय मुद्दों, स्थानीय मुद्दों...

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जैव विविधता का भी रक्षक सशस्त्र सीमा बल

भारत के पड़ोसी देशों के साथ खुली हुई सीमाओं की रक्षा के लिए सशस्त्र सीमा बल को तैनात किया जाता है। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की कुल 629 सीमा चौकियों और 229 बीओपी (बॉर्डर आउट पोस्ट) की तैनाती वर्गीकृत वन्य क्षेत्रों में है। भारत की सीमा की सुरक्षा करने के अलावा एसएसबी अपनी नियुक्ति वाले वन्य क्षेत्रों में वन्य जीवों का संरक्षण कर जैव विविधता का भी संरक्षक बन गया है। विगत 22 सितम्बर को सशस्त्र...

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आर्थिक विकास की ग्रोथ पोल अवधारणा

किसी भी राष्ट्र का आर्थिक विकास उसके प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक एवं कुशल दोहन के साथ-साथ उनके उपयुक्त एवं सतत् उपयोग पर निर्भर करता है। इसके अतिरिक्त विकास की प्रक्रिया में संसाधनों का उचित वितरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यद्यपि भौगोलिक विविधता भी विकास के प्रतिमान को प्रभावित करती है। वृद्धि विकास सम्बन्धी ‘ग्रोथ पोल’ थ्योरी के जन्मदाता फ्रांस के अर्थशास्त्री फ्रैंकोस...

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आणविक ऊर्जा पर भारत का जोर क्यों!

भारतीय आणविक ऊर्जा अधिनियम, 1962 में आणविक और रेडियोधर्मी प्रौद्योगिकियों के विकास से सम्बंधित सभी पहलुओं के लिए कानून सम्मत अवसंरचना का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत आणविक प्रौद्योगिकियों की सुरक्षा किया जाना भी शामिल है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय आणविक ऊर्जा एजेंसी (आईएआईए) की भूमिका का सदैव समर्थन किया है। समस्त विश्व इस बात से चिंतित है कि ऊर्जा के प्राकृतिक संसाधन जल एवं खनिज...

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सांख्यिकी पद्धतियों का उपयोग

भूगोल में सांख्यिकी पद्धतियों का उपयोग 19वीं सदी के मध्यकाल से ही किया जा रहा है। वॉन हम्बोल्ट एवं कार्लरिट्टर आदि महान भूगोलविदों ने भूगोल में सांख्यिकी पद्धतियों के उपयोग को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है। इसके महत्व को अधिक स्पष्ट करते हुए टॉरो यामने ने कहा कि ‘‘ सांख्यिकी विषय के अंतर्गत संख्यात्मक तथ्यों का संकलन, सारणीय विश्लेषण के सिद्धान्त, उनकी विधियों व व्यवहार का अध्ययन...

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मंगल ग्रह तक भारत की सफल यात्रा गाथा

किसी अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की कक्षा से बाहर अंतरिक्ष के निर्वात में ले जाना और फिर किसी अन्य ग्रह की कक्षा में स्थापित करना एक बड़ी कठिन चुनौती है। पृथ्वी का गुरुत्व बल अपने वायुमंडल की सभी वस्तुओं को अपनी ओर खींचता है, और अंतरिक्ष यान को भी। पृथ्वी का सघन वायुमंडल इसके अंदर होकर गुजरने वाले राकेट की गति को बाधित करता है। एक राकेट का सफर कई बाधाओं को पार करने के बाद पूरा होता है। मंगल...

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भू-आकृति विज्ञान अर्थात भौगोलिक संरचनाओं का अध्ययन

भौगोलिक परिवर्तनों के कारण पृथ्वी की सतह पर निर्मित होने वाली विभिन्न प्रकार की आकृतियों, इनकी संरचना के लिए होने वाली विभिन्न प्रकियाओं, उच्चावच तथा स्थलीय स्वरूपों की स्थापना सम्बन्धी कारणों का अध्ययन भू-आकृति विज्ञान के अंतर्गत किया जाता है। इसकी उपयोगिता भूगोल, पुरातत्व विज्ञान, भू-अभियांत्रिकी विज्ञान, तकनीकी भू-अभियांत्रिकी, भू-ज्यामिति आदि विषय क्षेत्रों में है। पृथ्वी...

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उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति के पूर्वानुमान

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति संबंधी आपदाओं का अपचयन, जोखिम विश्लेषण, सुभेद्यता विश्लेषण, तैयारी एवं आयोजना, पूर्व चेतावनी, रोकथाम एवं उपशमन सहित अनेक कारकों पर निर्भर करता है। दक्षिण एशिया की सामाजिक आर्थिक परिस्थितियों के कारण पूर्व चेतावनी इसके लिए एक प्रमुख घटक है। पूर्व चेतावनी घटक में चक्रवात मानीटरन एवं पूर्वानुमान में कौशल, प्रभावी चेतावनी उत्पादों का विकास एवं प्रसार,...

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मानचित्रण की कला एवं इसकी उपयोगिता

भौगोलिक विशेषताओं से युक्त किसी स्थान की आकारिकी, अक्षांश व देशान्तरीय विस्तार के अनुसार स्थिति, इससे सम्बद्ध भौगोलिक आकृतियों यथा - पर्वतों, नदियों आदि का मापन व निर्धारण मानचित्रण कहलाता है। वर्तमान काल में देशों-प्रदेशों तथा उनके अंदर स्थित विभिन्न भौगोलिक संरचनाओं वन प्रदेशों, तटीय भूमि, जल संसाधन क्षेत्रों, खनिज संसाधन क्षेत्रों, कृषि भूमि, जलवायु, धरातल के उच्चावच को मानचित्रण...

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कोपेन द्वारा वर्गीकृत भारत के मुख्य जलवायु प्रदेश

Amw - यह उष्ण कटिबंधीय (मानसूनी) आर्द्र मुख्य जलवायु प्रदेश है जिसमें सबसे ठण्डे माह का तापमान 18 डीग्री सेंटीग्रेड से ऊपर रहता है तथा इसमें लघु शुष्क ऋतु भी होती है। ऐसी जलवायु भारत में कांकण एवं मालाबार तटवर्ती क्षेत्रों में पायी जाती है जिनमें गोवा दक्षिणी पश्चिमी महाराष्ट्र, पश्चिमी कर्नाटक, केरल तथा कन्याकुमारी तक फैला तमिलनाडु तट सम्मिलित है। इनके अतिरिक्त त्रिपुरा व दक्षिणी...