भूगोल और आप

जैव विविधता के लिए जरूरी है जैव संस्कृतिवाद

नव उदारवाद की वैश्विक संस्कृति के अंतर्गत, बहुत सारी जैव विविधता नीति और व्यवहार को बढ़ावा दिया गया है और उनको अपनाया गया है परन्तु इसका तर्क बिलकुल अलग है।

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जैव विविधता संरक्षण औऱ संबंधित मुद्दों पर विचार

जैव विविधता के अत्यधिक दोहन से इसके संरक्षण में आर्थिक लागत का लगना निश्चित है और इस संदर्भ में प्राथमिक संरक्षकों के अधिकारों को मान्यता दिया जाना तथा उन्हें पुरस्कृत किया जाना महत्वपूर्ण है। जैव समृद्धि के युग की ओर का रास्ता साझे लाभ की नैतिकता और साम्यता के सिद्धान्तों से जुड़ा है। जैव विविधता का संरक्षण एक सतत प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के दो सिरे हैं अर्थात एक तत्स्थानी संरक्षण...

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जैव विविधता को संरक्षित करें और पृथ्वी को बचाएं

जैव विविधता से आशय जीव जंतुओं, वनस्पतियों, सूक्ष्म जैविकों, पर्यावरण और हम सभी मानवों से है। इसका संबंध पृथ्वी के जैविक और अजैविक दोनों संघटकों से है। जब तक इन सभी संघटकों का सह अस्तित्व बना रहेगाए इनके बीच सामंजस्य और संतुलन कायम रहेगा जिससे अन्ततः पृथ्वी रहने योग्य बनी रहेगी। जैव विविधता का महत्व साधारणत: इस आधार पर आंका जा सकता है कि यह हम सबकी उत्तर जीविता के लिए सभी कुछ (भोजन, ईंधन,...

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थार रेगिस्तान में जल संसाधनों की देखभाल आवश्यक

थार रेगिस्तान में लोग फसलों व जानवरों के साथ मिश्रित खेती, में अपने परम्परागत ज्ञान का प्रयोग करते हैं। भू-जल को ऊपर खींचने से कुओं के पुर्नचक्रण की शक्ति घटी।

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दक्षिण ध्रुव व जलवायु परिवर्तन औऱ मानव समाज की सुरक्षा

वर्ष 2100 तक अंटार्कटिक प्रदेश में विस्तृत बर्फ की चादरें पूरी तरह पिघल चुकी होंगी, वहाँ का मानव समाज जलवायु परिवर्तन से प्रभावित होगा।

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भारत में मौजूद मानव प्रजाति का वर्गीकरण

भारत में अलग-अलग प्रदेशों में रहने वाली मानव प्रजाति की कद-काठी, मुखाकृति की बनावट में भिन्नता पायी जाती है। रहन-सहन और कार्य निपुणता में भी भिन्नता है।

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बहुत उपयोगी हैं भारत में पशु संसाधन

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ पशु एक महत्वपूर्ण संसाधन है। यहाँ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। पशु संसाधन से विभिन्न प्रकार की खाद्य वस्तुएँ तो प्राप्त होती ही हैं, साथ ही इनका उपयोग कृषि कार्यों, बोझा ढोने व यातायात के साधनों के रूप में किया जाता है। भारत में विश्व की लगभग 16 प्रतिशत गायें, 50 प्रतिशत भैंसे, 20 प्रतिशत बकरियाँ व 4 प्रतिशत भेड़ें पायी जाती हैं।...

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जानलेवा और विनाशकारी होती हैं सुनामी तरंगें

जापान में सु-नाह-मी के नाम से जाना जाने वाला यह शब्द आमतौर पर अपने प्रचलित रूप में सुनामी के रूप में विख्यात है। समुद्र में कंपन के फलस्वरूप जो तेज और ऊँची लहरें उठती हैं, वे एक के बाद एक लगातार आती रहती हैं और आम तरंगों से कई गुणा ज्यादा ताकतवर होती हैं । दरअसल सुनामी जापानी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब होता है समुद्रतटीय तरंगें। यह जापानी भाषा के दो शब्दों को मिलाकर बनाया गया है- ‘सू’ यानी...

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वन प्रबंधन में जेएफएम समितियों की भूमिका

भारत सरकार द्वारा 1990 में संयुक्त वन प्रबंधन के संबंध में सामर्थ्यकारी दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बाद से भारत में संयुक्त वन प्रबंधन (जेएफएम) वन प्रबंधन की आधारशिला बन चुका है। इन दिशा-निर्देशों को वनों की रक्षा करने, उनका उपयोग करने तथा प्रबंधन करने के मामले में समुदायों की भूमिका को बदलते परिप्रेक्ष्य में लागू किए जाने के व्यापक प्रयास के तौर पर देखा गया  है, जैसा कि राष्ट्रीय वन...

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देखना हो विजय नगर तो जायें हंपी

हंपी, भगवान शिव के विरूपाक्ष मंदिर अथवा पंपापति का स्थान है जोकि विजय नगर के राजाओं के पारंपरिक एवं पारिवारिक भगवान थे। यह मंदिर बेलारी जिले में तुंगभद्रा नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है और यह कर्नाटक में होसपेट शहर से नौ मील की दूरी पर है। यह विजय नगर का सबसे पुराना और पवित्र मंदिर है। यह मंदिर 1565 ईस्वी में तालीकोटा के युद्ध में विनाश से अद्भुत तरीके से बच गया था। आरंभ में इस महान एवं...