भूगोल और आप

अनुसंधान में भौगोलिक आयाम को जोड़ना होगा

पृथ्वी पर मौजूद सभी प्रणालियों को संगठित किया जा रहा है और समेकित अध्ययन जिनमें वातावरण, भूगर्भमंडल, जैवमंडल शामिल हैं, के अध्ययनों को समेकित करके सभी को एक साथ रखा जाता है। इसलिए पृथ्वी प्रणाली विज्ञान का समेकित अध्ययन किए जाने की नई प्रवृत्ति सामने आयी है। तैयार किए जा रहे भौगोलिक डाटा से भी इस समेकन में मदद मिलेगी तथा अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। क्षेत्रीय मुद्दों, स्थानीय मुद्दों और कतिपय क्षेत्रों के लिए विशिष्ट मुद्दों के कारण समस्या पैदा होती है। इनमें से प्रत्येक मुद्दे का एक आकाशीय या भौगोलिक आयाम होता है। प्रत्येक मुद्दे की विभिन्न विशेषताओं को समझना होगा और अन्य प्रत्येक मुद्दे के साथ भौगोलिक आयाम को क्षैतिज और क्रमिक रूप से जोड़े जाने की जरूरत है। उदाहरण के लिए यदि हमए किसी एक जलवायु क्षेत्र को लेते हैं, इस क्षेत्र के भीतर बहुत सारी फसलें हो सकती हैं जो उगाई जाती हैं। फिर एक फसल क्षेत्र के भीतर विभिन्न कारकों का एक संयोजन होगा जो मृदा,  जल, उर्वरता आदि की उत्पादन दर को प्रभावित करेगा। अब यदि किसी एक कारक जैसे कि जल आपूर्ति के मामले में परिवर्तन होता है तो दूसरे अन्य कारकों पर उसका परिणामी प्रभाव पड़ेगा। इस प्रभाव को समझने तथा फसल पर पड़ने वाले प्रभाव अर्थात् फसल के उत्पादनए कृषि प्रणाली, सम्पूर्ण भोजन प्रणालीध्भोजन श्रृंखला आदि के साथ उसे जोड़े जाने की जरूरत है।

दूसरा उदाहरण लेत हैं यदि कोई आपदा आती है तो सिर्फ यही समझने की जरूरत नहीं है कि यह उस क्षेत्र विशेष में क्या प्रभाव पड़ता है बल्कि यह भी समझने की जरूरत है कि दूसरे अन्य क्षेत्रों में भी उसके क्या प्रभाव होते हैं और आर्थिक क्षेत्र किस प्रकार से प्रभावित होता है।

विभिन्न क्षेत्रों, विभिन्न जोनों या विभिन्न प्रकार की विशेषताओं के साथ इस प्रकार के जुड़ावों पृथ्वी को समझने या प्रबंधित करने के क्रम में अनुसंधान का मुख्य भाग इसी में निहित है। इसी मामले में हम लोग पीछे भी चल रहे हैं और इस अंतराल को भरे जाने की जरूरत है। कतिपय घटना के साथ जोड़े जाने हेतु कुछ अनुसंधान हो रहे हैं किन्तु भौगोलिक आयाम उसमें विद्यमान नहीं होते हैं।

पृथ्वी पर होने वाली प्रत्येक घटना का अपना भौगोलिक आयाम होता है जो कि प्रत्येक स्थानए क्षेत्र और मुद्दे के आधार पर अलग-अलग होते हैंए अर्थात् तीनों के आधार अलग-अलग होते हैं। प्रौद्योगिकी तथा भौगोलिक डाटा दोनों ही उपलब्ध हैं और नए समेकित अनुसंधान में भौगोलिक आयाम को जोड़े जाने से न सिर्फ पृथ्वी पर मौजूद संसाधनों बल्कि पृथ्वी प्रणालियों को भी प्रबंधित करने में सहायता मिलेगी।

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