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अर्जेंटीना में प्रथम विशाल डायनासोर के जीवाष्म की खोज

वैज्ञानिकों ने अर्जेंटीना में पृथ्वी पर विचरण करने वाले सबसे विशाल डायनासोर का जीवाष्म खोजा है। यह जीवाष्म टिटानोसौर की नई प्रजाति का है जो कि बड़ा शाकाहारी सौरोपोड्स है। इस डायनोसोर को ‘इंगेटिया प्राइमा’ (Ingentia prima) नाम दिया या है जो आज से 205 मिलियन वर्ष पहले धरती पर विचरण किया करता था और जिसकी लंबाई 5 से 10 मीटर थी। यह ट्रियासिक युग के अंत में अस्तित्व में था। इससे डायनासोर के विकासक्रम को फिर से विकसित करने की जरूरत पड़ सकती है। दरअसल, अब तक यही समझा जाता था कि सौरोपॉड (sauropods) डायनासोर का पृथ्वी पर पदार्पण आरंभिक जुरासिक काल में हुआ और पहला ऐसा डायनासोर 11 मीटर लंबा वुलकानोडोन था जो 180 मिलियन वर्ष पहले का था। परंतु इंगेटिया प्राइमा की खोज से सौरोपॉड की पृथ्वी पर उपस्थिति 30 मिलियन वर्ष पहले चली गई है। सौरोपॉड जिसके पतला एवं स्तंभाकार पैर थे और जिसका गर्दन व पूछ लंबा हुआ करता था। हालांकि यह डायनासोर दो पैरों पर विचरण करता था या चार पैरों पर, तथा क्या यह वास्तव में सौरोपॉड ही है, इस पर बहस हो सकती है। हालांकि कई वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके चार पैर थे और अधिकांश समय यह दो पैरों पर ही रहता था, कछु वैसे ही जैसे कि 210 मिलियन वर्ष पहले प्लैटियोसोरस इंगेलहार्ड्टी रहा करता था। डायनासोर परिवार वृक्ष में इंगेटिया को सौरोपोडोमोर्फ में वर्गीकृत किया गया है। यह वह वर्ग है जिसमें केवल ब्रॉण्टोसोरस जैसे विशाल डायनोसोर शामिल हैं वरन् उनके भाई व पूर्वज भी शामिल हैं।

पृथ्वी पर डायनासोर का विकासक्रम

पृथ्वी पर जीवों के विकासक्रम को विभिन्न युगों में बांटा गया है जो इस  प्रकार हैं;

  1. डेवोनियन कालः इसकी अवधि 410 से 360 मिलियन वर्ष पूर्व की है। सभी जीवों के पूर्वजों का विकास इसी काल में हुआ। इसी युग में जमीन पर जीवों का प्रथम आविर्भाव हुआ। इस युग में कुछ जीव समुद्र से निकलकर जमीन पर आए। ऐसा इसलिए कि जमीन पर स्थित खाद्य पदार्थों का दोहन नहीं हुआ था।
  2. कार्बोनिफेरस कालः इसकी अवधि 360 से 290 मिलियन वर्ष पूर्व की है। टेट्रापॉड्स के विकास मुख्य चरण यही युग है। उभयचरों से सरिसृपों का विकास इसी काल में हुआ। जानवरों ने पहली बार खोल वाले अंडा देना इसी काल में आरंभ किया। इससे पानी के बाहर जानवरों ने पहली बार पुनर्जनन आरंभ किया।
  3. पर्मियन कालः इसकी अवधि 290 से 250 मिलियन वर्ष पूर्व की है। इस अवधि में पृथ्वी पर सरिसृपों की संख्या बढ़ गई। स्तनधारी जैसे सरिसृप इस युग में देखे गए। ध्यातव्य है कि इस युग के अंत में पृथ्वी पर सबसे बड़ी प्रजाति विलुप्ति की परिघटना देखने को मिली जिसमें टेरापॉड परिवार की सभी 75 प्रतिशत प्रजातियां विलुप्त हो गई।
  4. ट्रियासिक कालः इसकी अवधि 250 से 210 मिलियन वर्ष पूर्व की है। इस काल में पृथ्वी पर सभी महाद्वीप एक ही महाद्वीप पैंजिया के हिस्सा थे। पृथ्वी पर प्रथम डायनासोर का आविर्भाव इसी काल के उत्तर में हुआ। इओरैप्टर, कोइलोफिजिसिस हेरेरासॉरस नामक डायनासोर इस काल में हुआ।
  5. जुरासिक कालः इसकी अवधि 210 मिलियन वर्ष से 150 मिलियन वर्ष पूर्व की है। इस काल में प्लेट विवर्तनिक के कारण पैंजिया में विभाजन आरंभ हुआ। पृथ्वी पर से अधिकांश सरिसृपों के नष्ट होने से डायनासोर की विविधता में बढ़ोतरी हुई और विशाल डायनासोर का आविर्भाव हुआ। 10 मीटर लंबा सौरोपॉड वुलकैनोडोन की अस्थि संरचना में भी कई बदलाव हुए। इन्हीं विशाल डायनासोर से ब्रैचियोसॉरस जैसे सॉरोपोड्स विकसित हुए।
  6. क्रिटैसियस कालः इसकी अवधि 150 मिलियन वर्ष से 65 मिलियन वर्ष पूर्व है। इस काल में विशाल सॉरोपॉड डायनासोर की जगह छोटे-छोटे ऑर्निथोपॉड ने ले ली। इसी युग के अंत में डायनासोर विलुप्त हो गए।

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