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आखिर क्या है ‘जेमिनिड उल्का वर्षा?

13-14 दिसंबर, 2018 को उत्तरी गोलार्द्ध में जेमिनिड उल्का वर्षा (Geminids meteor shower) की सर्वाधिक चमक देखने को मिली। हालांकि ये उल्कावर्षा 4 से 17 दिसंबर तक सक्रिय रहती हैं। जेमिनिड काफी विश्वसनीय उल्का वर्षा होती हैं जिसे पूरे विश्व में दो बजे रात्रि में देखा जा सकता है। उल्का वर्षा को जेमिनिड इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये जेमिनी नामक नक्षत्र से आती हुई दिखती हैं परंतु इस उल्का वर्षा का पैतृक निकाय 3200 फेथॉन (3200 Phaethon) नामक चट्टानी पिंड है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार जेमिनिड, 3200 फेथॉन के मलबों का टुकड़ा है।

प्रत्येक वर्ष दिसंबर माह में जेमिनिड सक्रिय होता है जब पृथ्वी विलक्षण प्रकृति के 3200 फेथॉन चट्टानी क्षुद्रग्रह के मलबों से होकर गुजरती है। इस उल्का का धूल व कंकड़ जब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है तब वह जल उठता है। जेमिनिड पृथ्वी के वायुमंडल से 78,000 मील प्रति घंटा की गति से यात्रा करती हैं और पृथ्वी से काफी ऊपर जल जाती हैं और शूटिंग तारों का परिदृश्य उत्पन्न करती हैं।

जेमिनिड उल्का वर्षा के बारे में सर्वप्रथम 1800 के दशक में रिपोर्ट की गई थी परंतु उस समय प्रति घंटा 10-20 उल्काएं ही दिखाई देती थीं परंतु नासा के अनुसार आज इनकी संख्या 120 प्रति घंटा हो गई हैं। आमतौर पर उल्का वर्षाओं की उत्पति बर्फीले धूमकेतु से होती है परंतु जेमिनिड उल्का वर्षा इसलिए विलक्षण हैं क्योंकि इनकी उत्पति चट्टानी पिंड से होती है।

जेमिनिड | 3200 फेथॉन क्या है?

3200 फेथॉन की प्रकृति के बारे में खगोलविदों में मतैक्य नहीं है। नासा के मुताबिक या तो यह पृथ्वी के नजदीक का क्षुद्रग्रह है या विलुप्त धूमकेतु है। कभी-कभी इसे चट्टानी उल्का भी कहा जाता है। फेथॉन की कक्षा के समान ही 2005 यूडी नामक अपोला क्षुदग्रह की भी कक्षा है जिसके बारे में कहा जाता है कि ये दोनों कभी एक ही बड़े आकाशीय पिंड का हिस्सा थे और किसी अन्य क्षुद्रग्रह से टकराने के पश्चात ये दो हिस्सों में बंट गए। इसका नामकरण प्राचीन यूनानी देवता अपोलो के पुत्र के नाम पर किया गया है। 3200 फेथॉन को सर्वप्रथम 1983 में इन्फ्रारेड एस्ट्रोनॉमिकल उपग्रह से देखा गया था।

क्षुद्रग्रह प्रत्येक 1.4 वर्षों पर सूर्य की चक्कर लगाता है। अक्सरहां यह पृथ्वी के नजदीक आ जाता है और बुध की कक्षा में सूर्य के बहुत नजदीक से भी गुजरता है। तब सूर्य से इसकी दूरी महज 0.15 खगोलीय इकाई होती है (खगोलीय इकाई या एस्ट्रोनॉमिकल यूनिट पृथ्वी एवं सूर्य के बीच की दूरी को कहते हैं:  लगभग 93 मिलियन मील या 150 मिलियन किलोमीटर)।

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