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आने वाले 200 वर्षों में गाय होगी पृथ्वी की सबसे बड़ी स्तनपायी!

यदि बड़े स्तनपायी जंतुओं की विलुप्ति मौजूदा दर से जारी रहती है तो आने वाले 200 वर्षों में 900 किलोग्राम की गाय, पृथ्वी पर सबसे बड़ी स्तनपायी होगी। जर्नल साइंस में प्रकाशित शोध आलेख के अनुसार आखेट, अवैध शिकार, मांसाहारी भोजन इत्यादि कारणों से विशालकाय स्तनपायी जानवर पृथ्वी पर से धीरे-धीरे विलुप्त हो रहे हैं।

इस शोध के मुताबिक स्तनपायी जंतुओं का आकार व विलुप्ति में गहरा संबंध है। अर्थात जो स्तनपायी विलुप्त हो गयें, वे जीवित रहने वाले स्तनपायी जंतुओं की तुलना में दो से तीन गुणा अधिक बड़े थे। अर्थात जो भी स्तनपायी पृथ्वी पर मौजूद हैं वे हजारों या लाखों वर्ष पहले के स्तनपायी जंतुओं की तुलना में आकार में छोटे हैं। शोध आलेख की मुख्य लेखिका व यूनिवर्सिटी आफ मैक्सिको की फेलिसा स्मिथ के अनुसार अफ्रीका से होमिनिड के प्रवजन (माइग्रेशन) के साथ बड़े आकार के स्तनपायी जंतुओं की विलुप्ति में एक स्पष्ट विन्यास दिखता है (माशेब्ल)। उनका यह भी कहना है कि यह अवधारणा कि ऊनी मैमथ, हाथी आकार के स्लाथ,  इत्यादि बड़े जंतुओं की विलुप्ति के लिए जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार है, सही नहीं है। जलवायु के परिवर्तन से जंतुओं में अनुकूलता बढ़ी, परंतु पृथ्वी से उनकी विलुप्ति के लिए यह प्रमुख कारण नहीं था। जलवायु में परिवर्तन से वे अन्य अनुकूल जगहों पर पलायन कर सकते हैं परंतु मानव के आने से उनकी संख्या पर असर पड़ा।

अब तक यही माना जाता रहा है कि ‘आकार अभिनति विलुप्ति’ ; (Size Biased Extinction) आस्ट्रेलिया में 35,000 वर्ष पहले आरंभ हुयी थी परंतु नया अध्ययन के मुताबिक यह प्रक्रिया 1,25,000 वर्ष पहले आरंभ हो गयी थी। नवीन अध्ययन के अनुसार आज से 1,25,000 वर्ष पहले जिन महाद्वीपों पर मानव का प्रवास था, वहां स्तनपायी जंतुओं का आकार, उन महाद्वीपों की तुलना में जहां मानव नहीं था, 50 प्रतिशत छोटा था। उदाहरण के तौर पर उत्तरी अमेरिका में मानव के आने के पश्चात जमीन पर विचरण करने वाले स्तनपायी जंतुओं का माध्य आकार 98 किलोग्राम से कम होकर 7.6 किलोग्राम हो गया।

वस्तुतः स्पष्ट व तार्किक अवधारणा यही है कि यदि एक खरगोस एक व्यक्ति का पेट भर सकता है तो एक बड़ा जानवर पूरे गांव का पेट भर सकता है। शिकार के लिए बड़े हथियारों के आविष्कार के साथ ही बड़े स्तनपायी जंतुओं के शिकार की गति में भी अभिवृद्धि होती चली गयी। इस तरीके से एक ‘नया विश्व’ का सृजन हुआ है जहां विशालकाय स्तनपायी जंतुओं का स्थान अपेक्षाकृत लघु स्तनपायी जंतुओं ने ले लिया और ‘आकार अभिनति विलुप्ति’ की प्रक्रिया जारी है। यही वजह है कि आने वाले 200 वर्षों में गाय सबसे बड़ी स्तनपायी होगी।

 

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