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इनसाइट मिशन ने पहली बार रिकॉर्ड किया हवा की आवाज

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ का इनसाइट मंगल मिशन, जो 26 नवंबर, 2018 को मंगल ग्रह पर उतरा था, मंगल ग्रह पर पहली बार किसी आवाज को सुना। इनसाइट के सेंसर्स ने पवन द्वारा कंपन से उत्पन्न हल्की सरसराहट को रिकॉर्ड किया। जिन दो सेंसर्स ने पवन की ध्वनि को रिकॉर्ड किया, वे हैं; लैंडर में लगा एयर प्रेसर सेंसर तथा लैंडर के डेस्क पर लगा सीस्मोमीटर। नासा के मुताबिक 1 दिसंबर, 2018 मंगल ग्रह पर पवन  10 से 15 मील प्रति घंटा (एमपीएच) अर्थात 5 से 7 मीटर प्रति सेकेंड गति से उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा में बह रही थी। वैसे इनसाइट मिशन का लक्ष्य मंगल ग्रह की आंतरिक संरचना का अध्ययन करना है। हालांकि नासा का कहना है कि इस मिशन के लक्ष्यों में एक लक्ष्य मंगल ग्रह पर गति का मापन भी है, स्वाभाविक है कि इस गति मापन में ध्वनि तरंगों से उत्पन्न गति का मापन भी शामिल है।

इनसाइट मिशन के लैंडर में लगे सीस्मोमीटर को ‘सिस्मिक एक्सपेरिमेंट फॉर इंटेरियर स्ट्रक्चर (Seismic Experiment for Interior Structure: SEIS) नाम दिया गया है। वहीं एयर प्रेसर सेंसर  एक्जुलियरी पेलोड सेंसर सबसिस्टम (एआरएसएस) का हिस्सा है।

इनसाइट मिशन के बारे में

इनसाइट ‘भूकंपीय जांच, जियोओडिसी व उष्मा अंतरण के द्वारा आंतरिक अन्वेषण’ ( Interior Exploration using Seismic Investigations, Geodesy and Heat Transport: InSight) का संक्षिप्त रूप है। यह नासा के डिस्कवरी कार्यक्रम का हिस्सा है। इनसाइट को 5 मई, 2018 को कैलिफोर्निया के वांडेनबर्ग एयर फोर्स अड्डा से प्रक्षेपित किया गया था। इनसाइट के साथ लैंडर के अलावा प्रायोगिक मार्स क्युब वन (मार्को) नामक क्युबसैट भी भेजा गया है। लगभग सात महीनों में 300 मिलियन मील (485 मिलियन किलोमीटर) की दूरी तय कर इनसाइट मिशन 26 नवंबर, 2018 को मंगल ग्रह पर उतरा था। यह मंगल ग्रह पर जिस जगह उतरा उसका नाम है ‘एलिसियम प्लैनिटिया’ जो कि लावा का प्रसार है।

यह मिशन अगले दो वर्षों में मंगल ग्रह की आंतरिक संरचना का अध्ययन करेगा ताकि यह जाना जा सके कि आज से लगभग 4 अरब वर्ष पहले पृथ्वी, चंद्रमा जैसे चट्टानी धरातल वाले ब्रह्मांडीय पिंडों का निर्माण कैसे हुआ। यह मंगल ग्रह के धरातल पर एक मंगल वर्ष, 40 मंगल दिवस या सोल तक संचालित रहेगा। एक मंगल वर्ष 687 पृथ्वी दिवस के बराबर है। मंगल ग्रह की आंतरिक संचरना का गहन अध्ययन करने वाला यह प्रथम बाह्य अंतरिक्ष रोबोटिक एक्सप्लोरर है। यह मिशन मंगल की टैक्टोनिक गतिविधि का दर भी निर्धारण करेगा तथा उल्का प्रभावों का भी अध्ययन करेगा।

मंगल ग्रह के बारे में

मंगल ग्रह एक शीत मरुस्थल है। यह पृथ्वी के आकार का आधा है। इसे लाल ग्रह भी कहा जाता है क्योंकि इसकी भूमि में लौह कण मौजूद हैं। इसके दो उपग्रह हैंः फोबोस एवं डीमोस। यह पृथ्वी के द्रव्यमान का दसवां हिस्सा है। मंगल ग्रह के वायुमंडल में 96 प्रतिशत कार्बन डाईऑक्साइड, 2 प्रतिशत आर्गन, 2 प्रतिशत नाइट्रोजन व 1 प्रतिशत अन्य गैस है।

मंगल ग्रह पर अब तक चार अंतरिक्ष एजेंसियां अपना मिशन सफलतापूर्वक भेज चुकी हैं। ये हैं; नासा, सोवियत संघ एवं यूरोपीयन अंतरिक्ष एजेंसी एवं इसरो। जापान एवं चीन ने भी मंगल मिशन भेजे परंतु वे असफल रहे। मंगल ग्रह का फ्लाइबाय करने वाला पहला सफल मिशन सोवियत संघ का स्पुतनिक 24 था। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने 5 नवंबर, 2013 को पीएसएलवी-सी25 से अपना पहला मंगल मिशन ‘मंगलयान’ प्रक्षेपित किया था। अपने प्रथम प्रयास में ही इसरो सफल रहा।

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