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‘ओमान की खाड़ी, विश्व में सबसे बड़ा ऑक्सीजन क्षयी मृत क्षेत्र’

यूनाइटेड किंगडम की ईस्ट एंगिला यूनिवर्सिटी के शोधकर्त्ताओं ने अपने शोध में पाया है कि ओमान की खाड़ी में ऑक्सीजन क्षयी मृत ज़ोन (Dead Zone) विश्व में सबसे बड़ा है। हालांकि इस मृत क्षेत्र के बारे में वैज्ञानिकों को पहले से पता था परंतु पायरेसी एवं संघर्ष क्षेत्र होने के कारण इसके बारे में अत्यधिक डेटा उपलब्ध नहीं था। पर अब जाकर वैज्ञानिकों ने ओमान की खाड़ी के डेड जोन या मृत क्षेत्र पर डेटा संग्रह किया है।

ईस्ट एंगिला यूनिवर्सिटी के शोधकर्त्ताओं ने आलोच्य मृत क्षेत्र के अध्ययन के लिए पानी के भीतर सीग्लाइडर्स नामक दो रोबोट भेजा।  इन रोबोटों ने आठ माह तक उस क्षेत्र को खंगाला। ऑक्सीजन स्तर का पता लगाने के लिए तस्वीर लेने हेतु इन रोबोटों ने उपग्रहों से संचार स्थापित किया। इसी क्रम में उन्होंने स्कॉटलैंड से भी बड़ा ऑक्सीजन रहित क्षेत्र का पता लगाया

क्या होता है मृत क्षेत्र?

यूएस सागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) के अनुसार ‘जल में ऑक्सीजन का अल्प घुलन को अक्सरहां मृत क्षेत्र कहा जाता है। सभी मछलियों, समुद्री पादपों एवं अन्य जीवों को जीवन के लिए ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। इसकी अनुपस्थिति में अधिकांश समुद्री जीवन या तो मृत हो जाते हैं या जो जीव, जैसे कि मछली, पलायन कर सकते हैं वे अन्यत्र चले जाते हैं। इससे जो समुद्री पर्यावास कभी जीवन से परिपूर्ण हो होता है वह जैविक मरुस्थल का रुप धारण कर लेते हैं।

एनओएए के अनुसार हाइपोक्सिक जोन (निम्न ऑक्सजीन वाला क्षेत्र)  प्राकृतिक तौर पर उत्पन्न हो सकते हैं किंतु मानवीय गतिविधियों से भी ऐसे क्षेत्र सृजित हो सकते हैं। इसके लिए भौतिक, रासायनिक या जैविक कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। मानव द्वारा ऐसे क्षेत्र की उत्पति में पोषक प्रदूषण प्रमुख रुप से जिम्मेदार हैं। जमीन से प्रवाहित आधिक्य पोषक नदियों व तटों के द्वारा सागर में प्रवेश कर जाते हैं जो शैवालों को तेजी से विकास के लिए उत्प्रेरित करते हैं। ये बाद में जल में समा जाते हैं और विघटित हो जाते हैं। विघटन की यह प्रक्रिया अत्यधिक ऑक्सीजन का उपभोग करती है जिसके कारण समुद्री जीवों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक ऑक्सजीन की आपूर्ति प्रभावित होती है।

ईस्ट एंगिला यूनिवर्सिटी के शोधकर्त्ताओं के अनुसार जलवायु परिवर्तन ने स्थिति को और विकट बना दिया है क्योंकि अधिक गर्म जल कम ऑक्सीजन को धारण करते हैं। इसके अलावा जमीन से उर्वरकों एवं  सीवेज के समुद्र में मिलने से भी संकट पैदा हुआ है।

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