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कॉफी उत्पादन में विशिष्ट पहचान अराकू घाटी

भारत सरकार कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया के जरिये ‘एकीकृत कॉफी विकास परियोजना’ का क्रियान्वयन कर रही है जिसके तहत कॉफी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना में पुनर्रोपण एवं विस्तार, जल संचयन एवं सिंचाई बुनियादी ढांचे का निर्माण और कॉफी एस्टेट के परिचालन के मशीनीकरण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना शामिल है। इसके अलावा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के आयोजन और संबंधित क्षेत्रों में प्रदर्शन के लिए तकनीकी सहायता भी दी जाती है। एसएचजी और उत्पादन समूहों के लिए प्रति किलोग्राम 10 रुपये का प्रोत्साहन देकर कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया अराकू घाटी में कॉफी के सामूहिक विपणन को सुविधाजनक बना रहा है।

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले में स्थित अराकू घाटी के जनजातीय समुदायों द्वारा उत्पादित की जाने वाली कॉफी की विशिष्ट पहचान के संरक्षण के लिए भौगोलिक संकेतों के तहत अराकू घाटी में उत्पादित होने वाली कॉफी के पंजीकरण के लिए कॉफी बोर्ड द्वारा आवेदन किया गया है। अराकू घाटी क्षेत्र में उत्पादित होने वाली अराबिका कॉफी एक उत्तम गुणवत्ता वाली विशेष कॉफी के रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हो गई है। कॉफी बोर्ड ने देश में उत्पादित होने वाली विभिन्न कॉफी किस्मों के लिए उनकी भौगोलिक विशिष्टता के आधार पर विशेष लोगो विकसित किए हैं।

अराकू घाटी दक्षिण भारत में स्थित एक पर्यटक स्थल है और इसकी गिनती सबसे कम प्रदूषित क्षेत्रों में होती है। यह चारों ओर से संकारीमेट्टा, रक्तकोंडा, गालकोंडा और चितामोगोंड आदि पर्वतों से घिरी हुई है। ओडिशा व आंध्र प्रदेश की सीमा के निकट स्थित अराकू घाटी विशाखापत्तनम से 114 किलोमीटर दूर है। इसके संरक्षित वन क्षेत्रों में संकारीमेट्टा और अनंतगिरि हैं।

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