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डीएनए से प्रथम अंतर-प्रजातीय मानव प्रजाति की खोज

रूस में साइबेरिया के अल्ताई पहाड़ियों की डेनिसोवा घाटी की गुफा में वर्ष 2012 में एक अस्थि प्राप्त हुयी थी जो आज से 50,000 वर्ष पहले मर गई एक युवती की है। नेचर पत्रिका में प्रकाशित शोध रिपोर्ट के अनुसार इस युवती की हड्डी का जब डीएनए परीक्षण किया गया तब पता चला कि यह किसी एक मानव प्रजाति से संबंधित नहीं है वरन् इसमें दो मानव प्रजातियों का मिश्रण है। इसमें डेनिसोवांस एवं निएंडरथल, दोनों के डीएनए पाए गए। अर्थात वह युवती आधी डेनिसोवांस एवं आधी निएंडरथल है। इस शोध के अनुसार उस लड़की की माता निएंडरथल थी जबकि पिता डेनिसोवांस था। विभिन्न प्राचीन मानव प्रजातियों के बीच प्रजनन एवं  बच्चों के जन्म का प्रथम प्रत्यक्ष प्रमाण है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस युवती को ‘डेनिसोवा 11’ नाम दिया है। शोधकर्त्ताओं के अनुसार इस युवती की मौत 13 साल में हो गई थी जिसका कारण अभी अज्ञात है।

इस युवती के गुणसूत्र में डेनिसोवांस एवं निएंडरथल के 50ः50 मिश्रण पाए गए। डेनिसोवासं एवं निएंडरथल आदि मानव हैं जो आज से 4,00,000 से 5,00,000 वर्ष पहले विभाजित हो गए थे। चूंकि उस युवती की माइटोकॉण्ड्रियल डीएनए, जो कि मातृ पक्ष से विरासत में प्राप्त होती है, निएंडरथल की थी, इस आधार पर शोधकर्त्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि डेनिसोवा 11 की माता निएंडरथल मानव थी।

हालांकि प्राचीन जीनोम के शोध के आधार पर पहले भी वैज्ञानिक मानते रहे हैं कि डेनिसोवांस, निएंडरथल एवं आधुनिक मानव ने यूरोप एवं एशिया में हिम युग में सहवास किया। आज के कई लोगों में डेनिसोवांस एवं निएंडरथल जैसे आदि मानव के जीन पाए जाते हैं। साइबेरिया गुफा में जो पहले के जीवाष्म प्राप्त हुए हैं उसके अनुसार सभी तीन आदि मानव प्रजातियों विभिन्न समयों में वहां निवास किया।  किंतु ऐसा पहली बार है जब प्रत्यक्ष तौर पर प्रथम पीढ़ी की हाइब्रिड प्रजाति पाई गई है।

शोध प्रक्रियाः मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर इवोल्युशनरी एंथ्रोपोलॉजी, लीपजिग (जर्मनी) के वैज्ञानिक एवं शोध के सह-लेखक विवियाने स्लोन के मुताबिक आज के दो लोगों की तुलना में निएंडरथल एवं डेनिसोवान आनुवंशिक तौर पर एक-दूसरे काफी भिन्न थे। ऐसे में उनके एक साथ प्रजनन करने की संभावना काफी कम थी। ऐसे में  हाइब्रिड मानव का प्रमाण मिलना महत्वपूर्ण खोज कही जा सकती है।  शोधकर्त्ताओं ने 1 इंच लंबी (2.5 सेंटीमीटर) हड्डी का जीनोम अध्ययन किया। पहले तो वैज्ञानिकों को यह पता लगाना था कि यह मानव की ही हड्डी है। इसके लिए डेनिसोवा-11 एवं डेनिसोवा गुफा में मिले 2000 से अधिक हड्डियों से निकाले गए प्रोटीन का अध्ययन किया गया। इससे इस बात की पुष्टि हुई की यह मानव का ही जीवाष्म है। डेनिसोवा 11 की हड्डी के बाहरी हिस्सा की मोटाई से उसके लड़की होने का पता चला। रेडियोकार्बन विधि से इसके 50,000 वर्ष पुराने होने की पुष्टि हुई।

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