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तापमान में वृद्धि से बढ़ेगी हर प्रकार की समस्या

आज हर व्यक्ति पर्यावरण की बात करता है। प्रदूषण से बचाव के उपाय सोचता है। व्यक्ति स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त पर्यावरण में रहने के अधिकारों के प्रति सजग होने लगा है और अपने दायित्वों को समझने लगा है। वर्तमान में विश्व ग्लोबल वॉर्मिंग के सवालों से जूझ रहा है इस सवाल का जवाब जानने के लिए विश्व के अनेक देशों में वैज्ञानिकों द्वारा प्रयोग और खोजें हुई हैं। उनके अनुसार अगर प्रदूषण फैलने की रफ्तार इसी तरह बढ़ती रही तो अगले दो दशकों में धरती का औसत तापमान 0.30C प्रति दशक के दर से बढ़ेगा।

तापमान की इस वृद्धि में विश्व के सारे जीव-जंतु बेहाल हो जायेंगे और उनका जीवन खतरे में पड़ जाएगा। पेड़ पौधों में भी इसी तरह का बदलाव आएगा। सागर के आसपास रहने वाली आबादी पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। जल स्तर ऊपर उठने के कारण सागर तट पर बसे ज्यादातर शहर इन्हीं सागरों में समा जाएंगे। हाल ही में कुछ वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो कुपोषण और विषाणुजनित रोगों से होने वाली मौतों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। जलवायु परिवर्तन से हर साल पचास लाख लोग बीमार पड़ रहे हैं।

इस पारिस्थितिक संकट से निपटने के लिए मानव को सचेत रहने की जरूरत है। दुनिया भर की राजनीतिक शक्तियाँ इस बहस में उलझी हैं कि गरमाती धरती के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए। अधिकतर देश मानते हैं कि उनकी वजह से ग्लोबल वॉर्मिंग नहीं हो रही है लेकिन सच यह है कि इसके लिए जिम्मेदार कोई भी हो, भुगतना सबको पड़ेगा।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आज के औसत 15.5 डिग्री सेल्सियस तापमान के मुकाबले भविष्य में 22 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ सकता है। जिससे रेगिस्तानों में नमी का बढना, जानलेवा बीमारियों का बढ़ना, मैदानी इलाकों में गर्मी का बढ़ना, बर्फ का पिघलना, ग्लेशियरों का चटकना, तटीय इलाकों का जलमग्न होना सामान्य हो जायेगा।

भू-उष्मता के विषय पर अक्सर चर्चा होती है। वैज्ञानिक अपनी चिंता व्यक्त करते हैं। पत्र पत्रिकाओं में तत्संबंधी लेख भी छपते हैं। इस संकटकालीन परिस्थिति में भी अज्ञानतावश आम जनता इस विषय को उतना गंभीरता से नही लेती। अगर हम ये सोचें की अकेले व्यक्ति के सुधरने से क्या होगा तो ध्यान रखें कि हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा तथा याद रखें कि बूँद-बूँद से ही घड़ा भरता है और सभी लोग अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करें तो ग्लोबल वॉर्मिंग को भी परास्त किया जा सकता है। यह बहस जारी रहेगी लेकिन ऐसी कई छोटी पहलें हैं जिसे अगर हम अपनाएं तो धरती को बचाने में अपना आंशिक योगदान कर सकते हैं।

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