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धूलकण प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम

दिल्ली एवं उसके आसपास का क्षेत्र में रहने वाले लोग धूलकण प्रदूषण (Dust Pollution) में रहने को अभिशप्त हो गए हैं। अगस्त 2018 के प्रथम सप्ताह में  गुरुग्राम को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा देश के 62 शहरों में सर्वाधिक प्रदूषित शहर घोषित किया गया। गुरुग्राम का वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 को पार कर गया। जहां सरकार व स्थानीय प्रशासन इसके लिए अरब प्रायद्वीप की धूल भरी आंधी को जिम्मेदार ठहरा रहा है तो वहीं पर्यावरणविद् मानते हैं कि ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (जीआरएपी) का प्राधिकारों द्वारा क्रियान्वयन नहीं किया जाना ही इसके लिए उत्तरदायी है।

वैसे भारत के शहरों के लिए धूलकण प्रदूषण कोई नई परिघटना नहीं है। सरकार द्वारा भी समय-समय पर इस प्रदूषण से निपटने के लिए कदम उठाए जाते रहे हैं। यह अलग बात है कि जमीनी स्तर पर उसका क्रियान्वयन प्रभावी तरीके से नहीं होता हो। आईए उन कदमों के बारे में जानें, जिसे सरकार द्वारा उठाए गए हैं। सरकार द्वारा धूलकण प्रदूषण से निपटने के लिए कई उपाय किए गए हैं। राज्यसभा में 6 अगस्त, 2018 को केंद्रीय पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री महेश शर्मा द्वारा दिए गए लिखित जवाब के अनुसार धूलकण प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने निम्नलिखित उपाए किए हैं:

  1. राष्ट्रीय परिवेशीय वायु गुणवत्ता मानक (National Ambient Air Quality Standards) की अधिसूचना जारी की गई हैः
  2. परिवेशीय वायु गुणवत्ता के आकलन हेतु निगरानी नेटवर्क की स्थापना की गई है।
  3. गैस ईंधन (सीएनजी, एलपीजी इत्यादि) जैसे स्वच्छ/वैकल्पिक ईंधन की शुरुआत व बढ़ावा दिया जा रहा है।
  4. इथेनॉल ब्लेंडिंग स्कीम आरंभ की गई है।
  5. राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक आरंभ किया गया है।
  6. बीएस-IV उत्सर्जन मानक को वर्ष 2017 से लागू गया है तथा बीएस-V में प्रवेश किए बिना 1 अप्रैल, 2020 से बीएस-VI उत्सर्जन मानक को अपनाने का निर्णय किया गया है।
  7. निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों के लिए धूल शमन उपायों को अनिवार्य तौर पर पालन किया जाना जरूरी है।
  8. निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 की अधिसूचना जारी की गई है।
  9. बायोमास के जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
  10. सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  11. प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणन जारी करने को मुख्य धारा में लाया गया है।
  12. बड़े उद्योगों द्वारा चौबीसों घंटों के लिए ऑनलाइन नियंत्रण निगरानी उपकरण स्थापित किए गए हैं।
  13. मानव रचना इनोवेशन एंड इनक्युबेशन सेंटर द्वारा वायु प्रदूषण शमन उपायों की प्रभावित को दर्शाने के लिए 30 बसों पर परियायतंत्र फिल्ट्रेशन (Pariyayantra filtration ) स्थापना की गई है।
  14. दिल्ली में राष्ट्रीय पर्यावरणीय इंजीनियरिंग शोध संस्थान (नीरी) द्वारा ट्राफिक इंटरेक्शन पर ‘विंड ऑगमेंटेशन एंड एयर प्युरिफाइंग यूनिट’(Wind Augmentation and Air Purifying Unit: WAYU) की स्थापना की जा रही है।
  15. पूरे देश में वायु प्रदूषण की बढ़ती समस्या से निपटन के लिए सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम’ (एनसीएपी) तैयार किया गया है। यह एक दीर्घकालिक समयबद्ध रणनीति है। इसका संपूर्ण उद्देश्य पूरे देश में प्रभावी परिवेशी वायु गुणवत्ता नेटवर्क का विकास करना है।

क्या होता है कणीय प्रदूषण?

संयुक्त राज्य पर्यावरणीय एजेंसी (यूएस ईपीए) के अनुसार कणीय प्रदूषण, जिसे पर्टिकुलेट मैटर या पीएम (Particulate Matter-PM) भी कहा जाता है, वायु में समा गए ठोस एवं द्रव बूंद का मिश्रण हॅै। 10 माइक्रोमीटर या इससे कम व्यास वाले कण सर्वाधिक समस्या खड़ी करते हैं। ये छोटे कण नाक एवं गला से होते हुए फेफड़ा में प्रवेश कर जाते हैं। एक बार श्वांस में इन्हें लेने के पश्चात ये फेफड़ा एवं हृदय को प्रभावित कर सकते हैं और लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य खतरा पैदा करते हैं। बड़े कण या 10 माइक्रोमीटर से अधिक व्यास के कण उतने खतरनाक नहीं होते क्योंकि ये फेफड़ा में प्रवेश नहीं कर पाते। पीएम2.5 से कम व्यास वाले कण में अल्ट्राफाइन व नैनोकण भी शामिल हैं जिनका व्यास 0.1 माइक्रोमीटर से कम होता है।

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