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नासा का पार्कर सोलर प्रोबः कोरोना में यह पिघलेगा क्यों नहीं?

नासा 6 अगस्त, 2018 के पश्चात हमारी सौर प्रणाली का केंद्र सूर्य के अध्ययन लिए पार्कर सोलर प्रोब (Parker Solar Probe) का प्रक्षेपण करेगा। इसे फ्लोरिडा के  केप कैनेवेरल प्रक्षेपण केंद्र से प्रक्षेपित करने की योजना है। इसे यूनाइटेड लॉन्च अलाएंस डेल्टा-IV (United Launch Alliance Delta IV Heavy)  हेवी अंतरिक्ष यान से प्रक्षेपित किया जाना है।

  • इस मिशन की अवधि सात साल है और इस दौरान यह सूर्य के सर्वाधिक नजदीक जाएगा। यह सूर्य के सर्वाधिक नजदीक (40 लाख मील) तक जाएगा जो कि सूर्य का कोरोना क्षेत्र है।
  • इस मिशन का नामकरण खगोलविद् यू. पार्कर के नाम पर हुआ है जिन्होंने वर्ष 1958 में सौर पवन (Solar Wind) के अस्तित्व पर पेपर प्रकाशित किया था। नासा का यह पहला मिशन है जिसका नामकरण किसी जीवित व्यक्ति के नाम पर हुआ है।
  • पार्कर सोलर प्रोब मिशन के मुख्यतः तीन उद्देश्य हैं। इसका पहला उद्देश्य है सौर पवन (सोलर विंड) के त्वरण के रहस्य का अध्ययन। सौर पवन सूर्य से प्लाज्मा व कणों को लेकर अंतरिक्ष में बिखेरता है। हालांकि यह पता है कि इसकी उत्पति सूर्य में होती है परंतु जिस बिंदु पर यह सुपरसोनिक गति पकड़ता है उसका अध्ययन किया जाना जरूरी है। आंकड़ें बताते हैं कि यह परिवर्तन सूर्य के कोरोना में होता है। पार्कर प्रोब इस कोरोना क्षेत्र में इसका अध्ययन करेगा।
  • इस मिशन का दूसरा उद्देश्य कोरोना (Corona) के अत्यधिक तापमान के रहस्य का अध्ययन है। जहां सूर्य का दिखने वाला धरातल का तापमान 10,000 फॉरेनहाइट है परंतु कोरोना का तापमान लाखों डिग्री फॉरनेहाइट है। कोरोना सूर्य का बाहरी वायुमंडल है। वैज्ञानिकों को इसी रहस्य को सुलझाना है कि कोराना यानी बाहरी वायुमंडल का तापमान, फोटोस्फेयर की तुलना में अधिक क्यों है?
  • इस मिशन का तीसरा उद्देश्य सौर ऊर्जावान कणों के त्वरण के पीछे के तंत्र को समझना है।
  • उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति हेतु पार्कर प्रोब में चार उपकरण लगे हैं; फील्ड्स (FIELDS), डब्ल्यूआईएसपीआर (WISPR), स्वीप (SWEAP) व आईएसओआईएस (ISOIS)।
  • पार्कर सोलर प्रोब, नासा के ‘लिविंग स्टार प्रोग्राम’ का हिस्सा है जो सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के विविध पहलुओं का अन्वेषण करता है जो जीवन व समाज को प्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित करता है।

कोरोना की अधिक गर्मी के बावजूद पार्कर सोलर प्रोब क्यों नहीं पिघलेगा?

  • पार्कर प्रोब सूर्य के कोरोना क्षेत्र में प्रवेश करेगा जहां का तापमान लाखों डिग्री फॉरेनहाइट है, इसके बावजूद यह नहीं पिघलेगा। पार्कर सोलर प्रोब को कुछ इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह इतने अधिक तापमान को भी सह लेगा। इसका कस्टम हीट शील्ड तथा ऑटोनॉमस सिस्टम सूर्य के गहन प्रकाश उत्सर्जन से इसे बचाएगा किंतु यह कोरोना सामग्रियों को इस प्रोब को स्पर्श नहीं करने देगा। इसके पीछे विज्ञान भी है।
  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार अंतरिक्ष में तापमान हजारों डिग्री हो सकती है किंतु जरूरी नहीं है कि इससे अधिक उष्मा का एहसास हो। चूंकि तापमान इस बात का मापन करता है कि कण कितनी तेज गति से गमन कर रहा है वहीं उष्मा इस बात का मापन करता है कि वह कितनी ऊर्जा को ट्रांसफर करता है। कण अधिक तेजी गति (अधिक तापमान) से गमन कर सकते हैं परंतु उनकी संख्या कम है तो वे अधिक ऊर्जा (उष्मा) ट्रांसफर नहीं कर सकते। चूंकि अंतरिक्ष अधिकांशतया रिक्त है इसलिए बहुत कम कण अंतरिक्षयान को ऊर्जा ट्रांसफर करेंगे। इसे एक उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है।
  • कोरोना, जहां से पार्कर सोलर प्रोब गुजरेगा, का तापमान काफी अधिक है परंतु वह अत्यधिक घना नहीं है। इसलिए तापमान अधिक होने के बावजूद कम उष्ण कणों के कारण अंतरिक्षयान बहुत कम उष्मा प्राप्त करेगा।

 

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