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भारतीय मानसून, अटलांटिक हरिकेन को कैसे प्रभावित कर रहा है?

हाल के एक अध्ययन के अनुसार हिंद महासागर में उत्पन्न होने वाला  मजबूत मानसून पूर्वोन्मुख पवन को प्रेरित कर सकता है जिससे अटलांटिक महासागर में उत्पन्न होने वाला हरिकेन पश्चिम में अमेरिका की ओर रूख कर सकता है। इस अध्ययन के मुताबिक जिस वर्ष गर्मी में मानसूनी वर्षा की तीव्रता अधिक होती है उस वर्ष मानसूनी पवन अटलांटिक हरिकेन को पश्चिम की ओर मोड़ देती है वहीं जिस वर्ष मानसूनी वर्षा कमजोर होती है हरिकेन उत्तर की ओर उन्मुख होकर उत्तरी अटलांटिक महासागर में समाप्त हो जाता है।

इस अध्ययन का सार यही है कि हिंद महासागर में उत्पन्न मानसून एवं अटलांटिक महासागर में उत्पन्न होने वाले हरिकेन में गहरा संबंध है। इस नए अध्ययन से वैज्ञानिकों को हरिकेन के बारे में पूर्वानुमान करने में सहायता मिलेगी खासकर सितंबर माह में जब हरिकेन काफी सक्रिय होता है। सामान्य तौर पर मानसूनी वर्षा सितंबर माह में समाप्त हो जाती है परंतु जलवायवीय पूर्वानुमान यही कहता है कि भावी उष्णता को देखते हुए मानूसनी वर्षा में बढ़ोतरी होगी और मानसून मौसम वर्ष में सितंबर के बाद भी जारी रह सकता है। जबकि वैश्विक उष्णता जारी रहेगी, अटलांटिक हरिकेन पर इसका प्रभाव भी बढ़ता रहेगा।

अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन की जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स नामक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के मुख्य लेखक पैट्रिक केली, जो कि वाशिंगटन स्थित पैसिफिक नॉर्थवेस्ट नेशनल लैबोरेटरी में शोधकर्त्ता हैं, के अनुसार अध्ययन का निष्कर्ष आश्चर्यजनक इसलिए है कि भारत में होने वाली मानसूनी वर्षा आधी दुनिया दूर अटलांटिक हरिकेन को उत्प्रेरित करती है। इससे पहले शोधकर्त्ता हरिकेन में बदलाव को एन नीनो दक्षिणी दोलन (El Niño-Southern Oscillation (ENSO) से जोड़कर देखते रहे हैं। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के समुद्री तल तापमान में आवधिक परिवर्तन को ईएनएसओ कहा जाता है।

शोधकर्त्ताओं के मुताबिक अटलांटिक हरिकेन एवं भारतीय मानसून के बीच संपर्क सूत्र स्थापित करने वाला यह पहला अध्ययन है।  अल नीनो से अधिक ला नीना से हरिकेन प्रभावित होता रहा है। परंतु शोधकर्त्ताओं के मुताबिक ला नीना से यह पूर्वानुमान करना मुश्किल हो जाता है कि हरिकेन लैंडफॉल कहां करेगा।

केली मे मुताबिक वैसे तो ला नीना एवं भारतीय मानसून के बीच सह-संबंध है परंतु मानसून की मजबूती हरिकेन को उत्प्रेरित करने में ला नीना से स्वतंत्र भूमिका निभाती है। ला नीना हरिकेन की आवृत्ति में बदलाव के लिए उत्तरदायी है। इसका तात्पर्य है कि जहां ला नीना में बदलाव से अधिक हरिकेन की संभावना बनती है वहीं भारतीय मानसून के मजबूत होने से इसे अमेरिका के प्रभावित (लैंडफॉल) होने की संभावना प्रबल होती है।

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