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भारत की विश्वस्तरीय सुनामी चेतावनी प्रणालियाँ

लोगों के जीवन का नुकसान और छति को रोकने के उद्देश्य से सुनामियों का समय से पहले पता लगाने और समय पर चेतावनियाँ जारी करने के लिए एक सुनामी आरंभिक चेतावनी प्रणाली तैयार की गई है। सुनामी आरंभिक चेतावनी प्रणाली 2 घटकों को मिलाकर बनी है। सुनामियों का पता लगाने के लिए सेन्सरों का एक नेटवर्क और तटीय तथा निचले क्षेत्र में रहने वाले लोगों को समय पर स्थान खाली करने के लिए सामयिक चेतावनी का प्रसार करने के लिए संचार अवसंरचना।

26 दिसम्बर, 2004 के भूकंप और उसके बाद आई सुनामी से भारतीय तटरेखा में महासागरीय खतरों की प्रवणता का पता चला। इस घटना को देखते हुए भारत ने भूकंपीय जानकारी से सृजित सुनामी बुलेटिनों को जारी करने के लिए अपना अंतरिम सुनामी केन्द्र वर्ष 2005 की पहली तिमाही में आरंभ किया। बाद में अंतरिम सेवाओं के स्थान पर पृथ्वी प्रणाली विज्ञान संगठन (ईएसएसओ), भारत सरकार के अन्तर्गत भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केन्द्र (आईएनसीओआईएस) में एक भारतीय सुनामी आरंभिक चेतावनी प्रणाली, आईटीईडब्ल्यूएस की स्थापना की गई।

मॉडलिंग अध्ययनों से पता चलता है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के निकट घटित होने वाले सुनामी जनित भूकंप के लिए पानी के आने का समय 30 मिनट से भी कम होता है और भारतीय महाद्वीप के लिए पानी आने में 4 घंटे से अधिक समय लगते हैं। इसका तात्पर्य यह है कि द्वीप समूह तथा महाद्वीप के लिए चेतावनियाँ जारी करने हेतु अपनाई जाने वाली प्रक्रिया अलग-अलग होनी चाहिए।

आईटीईडब्ल्यूएस में प्री-रन मॉडल परिदृश्य पर आधारित डेटाबेस और निर्णय सहायता प्रणाली (डीएसएस) के बैक-एण्ड सहयोग के साथ नवीनतम संचार प्रणालियों के माध्यम से प्रभावित लोगों को मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार समय पर सुनामियों का अनुश्रवण करने और समय पर परामर्श जारी करने हेतु सुनामी जनित भूकंपों का पता लगाने के लिए भूकंपीय केन्द्रों, बॉटम प्रेशर रिकॉर्डरों (बीपीआर), टाइड गाज और अहर्निश (24 x 7) प्रचालनात्मक चेतावनी केन्द्रों का एक रियल-टाइम नेटवर्क उपलब्ध है। यह चेतावनी केन्द्र हिन्द महासागर में किसी बड़े भूकंप के आने के बाद 10 मिनट से भी कम समय में सुनामी संबंधी बुलेटिन जारी करने में सक्षम है और इस प्रकार अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह में निकटवर्त्ती स्रोत क्षेत्रों के लिए लगभग 10 से 20 मिनट का समय और महाद्वीप के मामले में कुछ घंटों का समय बचाव संबंधी कार्यों के लिए/समय-सीमा उपलब्ध होता है।

आईटीईडब्ल्यूएस की जानकारी का प्रसार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), गृह मंत्रालय (एमएचए), स्थानीय आपदा प्रबंधन अधिकारियों, जिला प्रशासकों और आम जनता को वेबसाइट, ई-मेल, संक्षिप्त सूचना सेवा (एसएमएस), फैक्स, इन्टरनेट प्रोटोकॉल पर ध्वनि (वीओआईपी) और वैश्विक दूर संचार प्रणाली (जीटीएस) के माध्यम से प्रसारित की जाती है।

आईटीईडब्ल्यूएस की स्थापना हिन्द महासागर के लिए एक टीएसपी के रूप में कार्य करने हेतु सभी आवश्यक सक्षमताओं के साथ की गई है। आईटीईडब्ल्यूएस के टीएसपी का प्रचालन (टीएसपी-ऑस्ट्रेलिया और टीएसपी-इंडोनेशिया के साथ) 12 अक्तूबर, 2011 को सुनामी मॉकड्रिल, आईओ वेव-11 प्रक्रिया के दौरान आरंभ हुआ।

आईटीईडब्ल्यूएस के आरंभ से अंत तक (एण्ड-टू-एण्ड) के कार्य प्रदर्शन का परीक्षणपहली बार सुमात्रा के पश्चिमी तट के सुदूर 12 सितंबर, 2007 को आए भूकंप और सुनामी की घटना के दौरान किया गया। भूकंप संबंधी सूचना भारत मौसम विभाग द्वारा (आईएमडी) द्वारा प्रचालित 17 भूमि आधारित भूकंपीय केन्द्रों तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्रोतों से लगभग 300 भूकंपीय केन्द्रों से वास्तविक कॉल डेटा के अनुश्रवण द्वारा घटना के 15 मिनट के भीतर उपलब्ध करा दी जाती है।

यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कि क्या कोई भूकंप सुनामी के कारण हुआ है भ्रंश क्षेत्र के निकट जल स्तर में परिवर्तनों को ठीक-ठीक मापना आवश्यक है। बॉटम प्रेशर रिकॉर्डरों (बीपीआर) का उपयोग खुले महासागर में सुनामी तरंगों के प्रसार तथा उसके फलस्वरूप समुद्र तल में हुए बदलावों का पता लगाने के लिए किया जाता है। एनआईओटी द्वारा सुनामियों का पता लगाने के लिए सुनामी के उद्गम क्षेत्रों के निकट बीपीआर का एक नेटवर्क संस्थापित किया गया है। इन बीपीआर द्वारा पानी की गहराई में 1 से.मी. से 6 कि.मी. तक होने वाले परिवर्तनों का पता लगाया जा सकता है। तट के निकट ज्वारीय गॉज का एक नेटवर्क सुनामी की प्रगति का अनुश्रवण करने और मॉडल परिदृश्यों को वैधीकृत करने में सहायक होता है। राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय केन्द्रों से नियर-रियल टाइम डेटा क्रमशः वी-सैट संचार और इन्टरनेट से प्राप्त किए जाते हैं।

आईटीईडब्ल्यूएस प्रणाली हिन्द महासागर में घटित होने वाली 6 से अधिक तीव्रता की  सभी भूकंप संबंधी घटनाओं का पता घटित होने के 20 मिनट से भी कम समय में लगा लेती है। गहरे महासागर में लगाए गए बीपीआर सुनामी की ट्रिगरिंग की पुष्टि करने के प्रमुख सेन्सर हैं।

एनआईओटी द्वारा 4 बीपीआर- 2 बंगाल की खाड़ी में और अरब सागर में संस्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त एनआईओटी और भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा सुनामी की लहरों की प्रगति का अनुश्रवण करने के लिए 30 टाइड गॉज संस्थापित किए गए हैं।

एकल बिन्दु विफलता से बचने के लिए संचार प्रणाली में एक उच्च स्तरीय अतिरेकता तैयार की जा रही है। आईएनसीओआईएस द्वारा सभी आवश्यक कम्प्यूटेशनल एवं संचार अवसंरचना के साथ सभी सेन्सरों, डाटा विश्लेषण के साथ-साथ सुनामी संबंधी परामर्श के सृजन एवं प्रसार को समर्थ बनाने के लिए एक अधुनातन आरंभिक चेतावनी केन्द्र की स्थापना की गई है।

भूकंपीय एवं समुद्रस्तरीय आंकड़ों का आईटीईडब्ल्यूएस में एक कस्टम-निर्मित सॉफ्टवेयर, जो पूर्व निर्धारित प्रवेश स्थल के पार किए जाने पर चेतावनी/ सावधानी बरतने की सूचना सृजित करता है, का उपयोग कर लगातार अनुश्रवण किया जाता है। सुनामी संबंधी चेतावनियों/ निगरानी को तब पूर्व निर्धारित निर्णय सहायता आधार पर तैयार किया जाता है और संबंधित प्राधिकारियों को कार्रवाई हेतु प्रसारित किया जाता है। एण्ड-टू-एण्ड प्रणाली की प्रभावोत्पादकता हिन्द महासागर में 12 सितम्बर, 2007 को समुद्र के अन्दर आए 8.4 तीव्रता के बड़े भूकंप के दौरान प्रमाणित हुई।

11 अप्रैल, 2012 को सुमात्रा में आई सुनामी दूसरी प्रमुख घटना थी जिसने इस प्रणाली की प्रभावोत्पादकता को साबित किया है। सुमात्रा के पश्चिमी तट के सुदूर 8.5 तीव्रता वाले एक भूकंप और इसके बाद आए 8.2 तीव्रता के भूकंप द्वारा सुनामी की घटना हुई। भूकंप से महासागर व्यापी एक लघु आकार का सुनामी सृजित हुआ जिसे विभिन्न टाइड गाजों और हिन्द महासागर में स्थित सुनामी बुआएज द्वारा रिकॉर्ड किया गया। आईटीईडब्ल्यूएस द्वारा 3 मिनट 52 सेकण्ड के भीतर भूकंप का पता लगाया गया और 6 परामर्श (बुलेटिन) जारी किए गए। अपने एसओपी के आधार पर आईटीईडब्ल्यूएस द्वारा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के केवल 3 क्षेत्रों में सुनामी चेतावनी जारी की गई जबकि सभी अन्य क्षेत्रों को चेतावनी/सावधानी के अन्तर्गत रखा गया। इस प्रकार त्रुटिपूर्ण चेतावनी और अनावश्यक रूप से लोगों को स्थान से हटाने से बचा गया, विशेषकर महाद्वीपीय भारत में।

आईटीईडब्ल्यूएस द्वारा अपनी कार्यप्रणाली में उल्लेखनीय सुधार किए गए हैं। संचार के विभिन्न माध्यमों के द्वारा विविध सेन्सरों से आंकड़ों की बेहतर प्राप्ति के साथ इसके प्रेक्षण नेटवर्क में सुधार हुआ है। नए निर्णय सहायता उपकरणों से तीव्रता के आधार पर मौजूदा परिदृश्य के परिणामों को कम या अधिक कर सुनामी पूर्वानुमान में सुधार लाया गया है। इसके पूर्व निर्धारित तीव्रता के प्री- रन परिदृश्य के आधार पर ऐसा किया जाता था।

एक विफला रहित उपग्रह संचार प्रणाली, वी-सैट द्वारा समर्थित आपातकालीन संचार प्रणाली (वीईसीएस) की अब स्थापना की गई है जो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 7 आपातकालीन केन्द्रों को जोड़ती है। उन्नत सूचना और संचार प्रौद्योगिकी सुविधाओं से भी परिकलन के समय में कमी आई है। सुनामी वेबसाइट – tsunami.incois.gov.in को विश्वव्यापी वेब कंसोर्टियम (डब्ल्यू 3 सी) मानकों के साथ रि-डिजाइन और विकसित किया गया है और इसका उपयोग ओपन वेब प्लेटफॉर्म के दिशानिर्देशों के अनुसार किया जा सकता है।

आईएनसीओआईएस में आईबीएम – उच्च कार्य निष्पादन कम्प्यूटिंग (एचपीसी) का उपयोग करके वास्तविक समय स्टॉर्म सर्ज मॉडलिंग एवं परामर्शों का सृजन की सुविधा और भूकंपीय तथा जीपीएस आंकड़ों का वास्तविक समय पर अधिग्रहण, रियल टाइम प्रसंस्करण डेटा साझेदारी, भंडारण और अभिलेखन के लिए एक राष्ट्रीय केन्द्रीय डेटापूल का सृजन किया गया है।

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