भूगोल और आप |

भारत में जलवायु सेवाएं और इनके प्रबंधन उद्देश्य

मौसम संबंधी उग्र स्थितियाँ पूरे विश्व में लोगों को प्रभावित कर रही हैं। इनमें से कुछ घटनाओं की तीव्रता और बारंबारता (बार-बार घटित होना) में वृद्धि होने की संभावना रहती है और ये भविष्य के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं। इन समस्याओं को सामना करने का एक तरीका नई अल्प-कार्बन ऊर्जा एवं परिवहन प्रौद्योगिकियों का विकास कर ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) के उत्सर्जन को कम से कम करने के लिए त्वरित और कारगर कदम उठाना है। दूसरी ओर सभी स्तरों पर संसूचित निर्णय लेकर अपरिहार्य जलवायु परिवर्तनों को अनुकूल बनाना भी आवश्यक है। इससे जोखिमों तथा लागतों को कम करने में सहायता मिल सकती है और अवसरों का लाभ उठाने में भी मदद मिल सकती है। इस प्रकार समय और स्थान के लिए सामान्य रूप से क्षेत्रीय एवं क्षेत्रक-विशिष्ट प्रयोक्ता अनुकूल जलवायु सूचना तैयार करना और इसका प्रावधान करना अनिवार्य है। उपयोगकर्त्ताओं को जलवायु संबंधी सूचना समय पर उपलब्ध कराने के साथ-साथ उपयोगकर्त्ता समुदायों की सूचना सेवा को रेखांकित करते हुए सेवा प्रदाताओं के लिए जानकारी उपलब्ध कराने हेतु एक प्रणाली होनी चाहिए।

जलवायु सेवाएं अतीत, वर्तमान और भविष्य की जलवायु और प्राकृतिक एवं मानव प्रणालियों पर इसके प्रभावों संबंधी कई प्रकार की सूचनाओं का सृजन और सामयिक प्रावधान करने से संबंधित हैं। जनता एवं उपयोगकर्त्ताओं को जलवायु संबंधी सूचना मुख्य रूप से जलवायु प्रेक्षणों, आंकड़ों के प्रसार एवं प्रबंधन, विभिन्न डेटा सेवाओं, जलवायु प्रणाली की निगरानी, विभिन्न उपयोगकर्त्ता-समूहों के लिए व्यावहारिक अनुप्रयोग और सेवा, विभिन्न समय मानों (मासिक, मौसमी, अंतर्वार्षिक और इसी प्रकार के अन्य) पर पूर्वानुमानों, जलवायु संबंधी प्रेक्षणों, जलवायु परिवर्तनशीलता एवं परिवर्तन के संबंधित नीतिगत मूल्यांकनों पर निर्भर करती है।

विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) द्वारा पहले ही विज्ञान आधारित जलवायु पूर्वानुमान सेवाओं के निर्माण, उपलब्धता, वितरण और अनुप्रयोग को सुदृढ़ बनाने के लिए एक वैश्विक फ्रेमवर्क की स्थापना की गई है। जीएफसीएस के कार्यान्वयन का मार्गदर्शी सिद्धांत मौजूदा कार्यतंत्रों एवं वर्षों से विकसित संस्थानों में जलवायु सेवाएं  के लिए प्रावधान तैयार करना है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) देश के लिए प्रचालनात्मक मौसम एवं जलवायु सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकारी तौर पर जिम्मेदार एजेंसी है। आईएमडी द्वारा जलवायु सेवाएं पुणे स्थित अपने जलवायु प्रभाग के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं जिसके द्वारा कई भारत-विशिष्ट जलवायु संबंधी गतिविधियाँ, जैसे- जलवायु मानीटरिंग एवं विश्लेषण, जलवायु पूर्वानुमान (मौसमी पूर्वानुमान), जलवायु डेटा प्रबंधन, जलवायु अनुसंधान और जलवायु सेवाएं का संचालन किया जा रहा है। मई, 2013 से जलवायु प्रभाग डब्ल्यूएमओ द्वारा दक्षिण एशिया के लिए मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय जलवायु केन्द्र (आरसीसी) के रूप में भी कार्य कर रहा है।

तथापि, जीएफसीएस के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर जलवायु सेवाएं प्रदान करने के लिए आईएमडी की मौजूदा जलवायु संबंधी गतिविधियों को समेकित किए जाने की आवश्यकता है। नए कार्य-कलाप, जैसे- वर्धित जलवायु सेवाएं से लोगों को भविष्य में जलवायु संबंधी उग्र घटनाओं के लिए आगे की योजना बनाने में समर्थता मिलेगी। भारत और दक्षिण एशिया में जलवायु और इसकी परिवर्तनशीलता को विश्वसनीय रूप से प्रेक्षित करने, समझने और पूर्वानुमान करने के लिए एमओईएस के जलवायु प्रभाग द्वारा निम्नलिखित कार्यों के निष्पादन का उद्देश्य है :

  • भारत और दक्षिण एशिया के लिए गुणवत्तायुक्त जलवायु डेटाबेसेस एवं सूचना प्रणालियों का विकास और देख-रेख करना;
  • उप-क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय, दोनों स्तरों पर सामयिक और प्रभावी आरंभिक चेतावनी सूचना का प्रसार करना और यूजर फीडबैक के साथ क्षेत्र-विशिष्ट उत्पादों के लिए एक ब्रॉड-बैण्ड प्रणाली का विकास करना;
  • जलवायु उत्पादों सेवाएं के अनुसंधान तथा विकास के लिए राज्य, क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय स्तरों पर जलवायु सेवाएं  के प्रदाताओं के बीच परस्पर विचार-विमर्श और सहयोग को बढ़ावा देना;
  • जलवायु अनुश्रवण एवं पूर्वानुमान उत्पादों में सुधार लाने के उद्देश्य से जलवायु सूचना के उत्पादकों एवं प्रयोक्ताओं की तकनीकी क्षमता का विकास करना; और
  • जलवायु परिवर्तन और परिवर्तनशीलता को अपने अनुकूल बनाने में समाज को मदद करने में जलवायु सेवाएं की आवश्यकताओं और इसके फायदों के बारे में जागरुकता सृजित करना और बढ़ाना।

देश में कारगर जलवायु जोखिम प्रबंधन हेतु संगत और आसानी से उपलब्ध होने वाली जलवायु सेवाएं  का निर्माण करने और इसके लिए उपलब्ध जलवायु सूचना के आर्थिक महत्व में वृद्धि लाने हेतु योजनाएं जारी हैं।

Post a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*