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मर रहा है अफ्रीका की पहचान-बाओबाब पेड़

अफ्रीका महाद्वीप के कुछ सबसे पुराने एवं सबसे बड़े बाओबाब पेड़  (Adansonia digitata) खतरनाक दर से मर रहे हैं या गिर रहे हैं। रोमानिया, दक्षिण अफ्रीका एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के संयुक्त पर्यावरणीय शोध दल ने 2005 से 2017 के बीच अफ्रीका के 60 से अधिक पेड़ों की तिथि निर्धारित की, जिनमें सबसे पुराने एवं सबसे बड़े बाओबाब पेड़ भी शामिल थे। नेचर प्लस पत्रिका में प्रकाशित शोध के मुताबिक अध्ययन अवधि (12 वर्ष) में ही 13 प्राचीनतम बाओबाब पेड़ों में 9 तथा 6 बड़े बाओबाब में से 5 या तो पूरी तरह निर्जीव हो गए हैं या उनमें से कुछ के हिस्सा या तना गिर चुके हैं या मृत हो चुके है। जिन नौ पेड़ों को इस अवस्था में पाया गया उनमें चार अफ्रीका के सबसे बड़े बाओबाब पेड़ हैं। सभी मृत पेड़ अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से/देशों; जिम्बाब्वे, नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका एवं जाम्बिया में स्थित थे।

अध्ययन दल के अनुसार मृत पाए गए बाओबाब में किसी बीमारी या महामारी के लक्षण नहीं दिखे जिससे वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि ये पेड़ जलवायु परिवर्तन का शिकार हो गए। हालांकि उनका यह भी कहना था कि जलवायु परिवर्तन संबंधी अवधारणा की पुष्टि के लिए और अधिक शोध की जरूरत है। उन्होंने जिंबाब्वे का  2450 वर्ष पुराना पवित्र पनकी नामक बाओबाब पेड़ का उदाहरण दिया जो 2010 और 2011 के बीच गिरकर मृत हो गया। सर्वाधिक लोकप्रिय बाओबाब बोत्सवाना का 1400 वर्ष पुराना चैपमैन है जो अफ्रीका महाद्वीप के जंगलों में पहुंचने वाला यूरोपीय यात्री डैविड लिविंगस्टोन का गवाह है। इस लोकप्रिय पेड़ के भी छह तने जनवरी 2016 में गिर गए।

बाओबाब पेड़ के अध्ययन के लिए आमतौर पर इस्तेमाल की जाने  वाली ‘ट्री रिंग पद्धति’ के बजाय नई रेडियोकार्बन तिथि तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि ‘ट्री रिंग पद्धति’ बाओबाब के लिए उपयुक्त नहीं है क्योंकि इसका तना अनिवार्य रूप से वार्षिक छल्लों का निर्माण नहीं करता।

  बाओबाब पेड़ की विशेषताएं

  1. अफ्रीकी बाओबाब पेड़ (Adansonia digitata) प्राचीनतम पुष्पीय पौधा है और यह अफ्रीका महाद्वीप के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में पाया जाता है।
  2. इसे ‘अप साइड डाउन ट्री’ या उल्टा पेड़ भी कहा जाता है क्योंकि इसकी ठूंठ शाखाएं जड़ जैसी दिखती हैं।
  3. बाओबाब के एक पेड़ में 500 क्युबिक मीटर की लकड़ियां हो सकती हैं और यह 2000 से अधिक वर्ष तक जीवित रह सकता है।
  4. इन पेड़ों के चौड़े तने में अक्सरहां खोखला गुहा पाया जाता है। इन गुहों का इस्तेमाल मानव द्वारा कई कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है, जैसे कि घर बनाने, दुकान खोलने, जेल का रूप देने इत्यादि।
  5. इसका फल मानव एवं जानवर, दोनों को पोषण प्रदान करता है। इसका फल विश्व का एकमात्र ऐसा फल है जो शाखाओं में ही प्राकृतिक रूप से सूख जाता है।
  6. अध्ययन से जुड़ी टीम का कहना है कि ये पेड़ अधिक दिन तक इसी कारण जीवित रहते हैं क्योंकि समय-समय पर इनमें नई शाखाएं आती रहती हैं। समय के साथ ये शाखाएं अंगूठी का आकार ले लेती हैं जिससे मध्य में गुहाकार खोखला बन जाता है।

One Comment

  1. Subhash Behere June 13, 2018 5:20 pm Reply

    Is this Gorakh imli tree? There are very few trees left. Wherever these trees are found they should be protected.

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