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विश्व पर्यावरण दिवस – 2017

‘‘मनुष्य और भूमि के बीच सौहार्द की एक स्थिति पर्यावरण संरक्षण है। भूमि के साथ सौहार्द एक दोस्त के साथ सौहार्द जैसा है’’-एल्डो लियोपोल्ड।

‘‘मैं प्रकृति, पशुओं, पक्षियों और पर्यावरण में ईश्वर को प्राप्त कर सकता हूँ।’’ – पैट बकले।

‘‘आखिरकार, निरन्तरता का अर्थ वैश्विक पर्यावरण का चलते रहना है। पृथ्वी की समस्त संपत्ति को रखना, बजाय इसके कि आप प्राकृतिक पूँजी को खोखला कर दें’’ – मॉरिस स्ट्रॉग।

विश्व पर्यावरण दिवस – 2017 प्रकृति से सम्बन्ध

पर्यावरण संरक्षण से सम्बंधित महत्वपूर्ण मुद्दों, यथा-वन सम्पदा का हृस, वैश्विक तापवृद्धि, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का क्षरण और कृषि उत्पादों की बर्बादी आदि विषयों को ध्यान में रखकर समस्त विश्व को इस बारे में जागरूक करने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्येक वर्ष 5 जून को एक वैश्विक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। 1972 में 5 से 16 जून तक आयोजित संयुक्त राष्ट्र के मानव पर्यावरण सम्मेलन में प्रत्येक वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का निर्णय लिया गया था। इसके पश्चात् 5 जून, 1973 को पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस एक विशेष थीम – ‘केवल एक पृथ्वी’ के साथ मनाया गया। तब से दुनिया के लगभग हर देश में इस परम्परा का पालन प्रतिवर्ष एक नयी थीम के साथ किया जाता है। और, इस बार विश्व पर्यावरण दिवस – 2017 की थीम है, ‘ प्रकृति से सम्बंध’ अर्थात् लोगों को प्रकृति के साथ जोड़ना (Connect with Nature – Connecting people with Nature)।

विश्व पर्यावरण दिवस-2017, भारत में वन संरक्षण

भारत सरकार एवं भारत की जनता प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी पर्यावरण को बचाने के लिए वैश्विक स्तर पर मनाये जाने वाले इस उत्सव में भागीदारी कर रही है। पर्यावरण के दृष्टिकोण से भारत के सामने अपनी वन सम्पदा का संरक्षण करना एक बड़ी चुनौती है। भारत में विगत् 50-60 वर्षों से वनों को लगातार काटा जा रहा है और यह सब आर्थिक उन्नति और भौतिक विकास के नाम पर हो रहा है। वर्तमान में भारत के कुल क्षेत्रफल का मात्र 19.39 प्रतिशत क्षेत्र (637,293 वर्ग किलोमीटर) वनाच्छादित है। जबकि भारत की वन नीति 1988 के अनुसार कुल वन भूमि लक्ष्य कुल क्षेत्रफल का एक तिहाई क्षेत्र (33.35 प्रतिशत) रखा गया है। भारत के कुल वन क्षेत्र का 50 प्रतिशत आरक्षित वनों की श्रेणी में रखा गया है।

सरकार द्वारा वन संरक्षण के लिए वन प्रबंधन की तीव्रीकरण योजना, आईएफएमएस (Intensification of Forest Management Scheme) को कार्यान्वित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य राज्य/संघ राज्य सरकारों के वन संरक्षण तंत्र को मजबूत करना तथा क्षेत्र विशिष्ट वन प्रबंधन में सहायता देना है। राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों से प्राप्त वार्षिक कार्य योजनाओं (एडब्ल्यूपी) की जाँच के बाद जांच समिति द्वारा उन्हें अनुमोदित किया जाता है तथा उचित बजट शीर्ष उपलब्धता के अनुसार वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। वित्तीय सहायता लागत भागीदारी के आधार पर दी जाती है। पूर्वोत्तर के सभी राज्य तथा जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के विशेष श्रेणी राज्य लागत का  10 प्रतिशत अंश वहन करते हैं और देश के अन्य शेष राज्य लागत का 40 प्रतिशत अंश वहन करते हैं। संशोधित निधियन प्रारूप के अनुसार केन्द्र सरकार द्वारा संघ राज्य क्षेत्रों को सौ प्रतिशत निधियां प्रदान की जाती हैं (पेज-69, वार्षिक रिपोर्ट 2015-16, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार)।

विश्व पर्यावरण दिवस-2017, कच्छ वनस्पति

पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने की दिशा में भारत सरकार द्वारा मैंग्रोव (कच्छ वनस्पति) वन क्षेत्रों का संरक्षण एवं प्रबंधन किया जाता है। उन सभी तटीय राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को सौ प्रतिशत वित्तीय सहायता केन्द्र सरकार की ओर से उपलब्ध करायी जाती है (वर्ष 2014-15 तक तथा वर्ष 2015-16 से आगे 50 प्रतिशत के अनुपात में केन्द्र एवं राज्य की सहायता) जो अपनी अनुमोदित प्रबंधन कार्य योजनाओं, जिसमें मूल और सहायक क्रियाकलाप शामिल होते हैं, के कार्यान्वयन के लिए इस बारे में अनुरोध करते हैं। सरकार ने गहन संरक्षण और प्रबंधन हेतु 38 मैंग्रोव और 4 प्रवाल भित्ति स्थलों को चिन्हित किया है।

विश्व पर्यावरण दिवस-2017, जैव विविधता

पर्यावरण संरक्षण के लिए देश की जैव विविधता को बचाना एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत सरकार ने वर्ष 2002 में जैव विविधता अधिनियम को अधिसूचित किया था और वर्ष 2003 में इसे लागू किया गया।

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