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सबसे लंबा चंद्रग्रहण 27 जुलाई, 2018 को, जानें ब्लू मून, ब्लड मून व सुपरमून

21वीं शताब्दी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण (Lunar Eclipse) 27 जुलाई, 2018 को होना है।  वैज्ञानिकों के अनुसार यह चंद्रग्रहण लगभग चार घंटे का होगा हालांकि  पूर्ण अंधकार, यानी जब पृथ्वी की छाया से चंद्रमा पूरी तरह ढ़क जाएगा, 1 घंटा 43 मिनट का होगा। यह चंद्रग्रहण पूरे विश्व विश्व में घटित होगा। वैज्ञानिकों ने इस चंद्रग्रहण को ‘ब्लड मून’की संज्ञा दी है।

इस बार चंद्रग्रहण अधिक अवधि का क्यों है?

स्पेस डॉट कॉम के अनुसार पृथ्वी की छाया से गुजरते समय चंद्रमा की स्थिति ही चंद्रग्रहण की अवधि निर्धारित करती है। चंद्रमा पर पृथ्वी के सबसे अंधकार वाला हिस्सा उम्बरा कहलाता है। या तो चंद्रमा शंक्वाकार विचरण करता है या फिर मध्य माध्यम के द्वारा विचरण करता है। मध्य माध्यम से विचरण करने में अधिक समय लगता है और इसी करण चंद्रग्रहण की अवधि लंबी होती है। इस बार चंद्रमा शंकु के मध्यम स्थिति से विचरण कर रहा है इसलिए इस बार का चंदग्रहण अपेक्षाकृत लंबा है। इसके अलावा इस बार चंद्रमा, पृथ्वी से अधिक दूरी पर होगा और इस कारण यह छोटा दिखेगा और पृथ्वी की छाया से निकलने में थोड़ा अधिक वक्त लगेगा।

ज्ञातव्य है कि चंद्र्रग्रहण को उसकी प्रकृति के आधार पर विभिन्न नामों से जाना जाता हैः यथा ब्लड मून, ब्लैक मून, ब्लू मून। आईइ जानें कि विभिन्न नामों का क्या मतलब होता है:

चंद्रग्रहण

जब चंद्रमा और सूरज के बीच पृथ्वी आ जाता है तब चंद्रग्रहण होता है।

ब्लड मून

यह परिघटना पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान घटित होती है। दरअसल पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान भी चंद्रमा पूरी तरह अंधकारमय होने के बजाय लाल रंग का हो जाता है जिसके कारण इसे ब्लड मून भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि पृथ्वी के सूर्योदय व सूर्यास्त का थोड़ा प्रकाश चंद्रमा के धरातल पर पड़ता है। चूंकि प्रकाश तरंगे प्रसारित हो जाती हैं इसलिए यह लाल दिखता है।

ब्लू मून

ब्लड मून के विपरीत ब्लू मून का संबंध नीला रंग से नहीं है वरन् परिघटना के दोहराव से है। एक ही कैलेंडर माह में दो बार पूर्ण चंद्र या पूर्णिमा की स्थिति को ब्लू मून कहा जाता है। दरअसल दो पूर्णिमा 29 दिनों के अंतराल में विभाजित हैं। परंतु अधिकांश महीनें 30 या 31 दिन का होने के कारण कभी-कभी एक ही माह में दो पूर्णिमा पड़ जाता है। नासा के अनुसार यह औसतन ढ़ाई सालों में एक बार घटित हो जाती है।

ब्लैक मून या अमावस्या

एक ही माह में दूसरा नव चंद्र की स्थिति को ब्लैक मून या अमावस्या कहते हैं।  यह असमान्य परिघटना है जो लगभग 32 महीनों के अंतराल पर घटित होती है।

सुपरमून

सुपरमून परिघटना तब घटित होती है जब पूर्णिमा के दौरान ही चंद्रमा, पृथ्वी की परिक्रमा करने के दौरान पृथ्वी के सर्वाधिक नजदीक होता है। अर्थात पूर्णिमा व पृथ्वी के निकटतम के संयोग को सुपरमून कहते हैं।

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