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‘सभी गांवों में बिजली’ बनाम ‘सभी को बिजली’

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल, 2018 को ट्वीट के जरिये देश को इस तथ्य से अवगत कराया कि 28 अप्रैल, 2018 का क्षण भारत के लिए ऐतिहासिक है क्योंकि इसी दिन मणिपुर के सेनापति जिला स्थित लीसांग गांव को राष्ट्रीय पावर ग्रिड से जोड़ दिया गया है जो भारत का अंतिम गांव है जहां बिजली पहुंचायी गयी है। इस तरह से 28 अप्रैल, 2018 को भारत के सभी गांवों का विद्युतीकरण हो चुका है। ज्ञातव्य है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने के तुरंत पश्चात घोषणा की थी कि 1000 दिनों के भीतर यानी 1 मई, 2018 तक भारत के सभी गांवों में बिजली पहुंचा दी जाएगी। दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) पोर्टल पर दिए गए आंकड़ों के अनुसार देश के कुल 597,464 जनगणना गांवों में से 597,464 गांवों में विद्युत पहुंचा दी गई है यानी भारत में गांवों का शत प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है।

Prime minister tweet on electricity in all villages

क्या है हकीकत?

प्रधानमंत्री की उपर्युक्त घोषणा के पश्चात कई लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने गांव में बिजली नहीं पहुंचने की शिकायत की। बाद में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने स्पष्टीकरण भी दिया कि देश के शत प्रतिशत गांवों में बिजली पहुंचाने का मतलब यह जरूर है कि देश के सभी गांवों में कम से कम 10 प्रतिशत घरों तक बिजली पहुंच गयी है। इसका मतलब यह भी नहीं है कि बिजली को केवल 10 प्रतिशत घरों तक ही सीमित रखा गया है। मंत्रालय के मुताबिक राज्यों के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार विद्युतीकरण स्तर 82 प्रतिशत से ऊपर है जो राज्यों में 47 से 100 प्रतिशत के बीच है। विद्युत मंत्रालय का यह भी कहना था कि जिन गांवों में बिजली नहीं पहुंचने की बात कही गई है वे जनांकिकी (जनगणना) गांव नहीं है। 1 अप्रैल, 2015 को दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) के तहत जिन 18,452 गांवों के पहचान गैर-विद्यृतीकृत गांवों के रूप में की गई थी वे जनगणना गांव थे। शत प्रतिशत गांवों की विद्युतीकरण के पश्चात जिन कुछ गांवों में बिजली नहीं पहुंचने की बात कही जा रही है वे बस्तियां, गांवड़ी, ढाणी, माजरा, टोला में अवस्थित घरों के साथ-साथ शहरी बस्तियों से जुड़े घर भी शामिल हैं।

तब और अब की स्थिति

केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्री आर.के. सिंह ने 19 दिसंबर, 2017 को राज्यसभा को सूचित किया था कि 1 अप्रैल, 2015 की स्थिति के अनुसार गैर-विद्यृतीकृत गांवों की संख्या 18,452 थी और 30 नवंबर, 2017 तक कुल 15,183 गांवों को विद्युतीकृत किया जा चुका था। 1052 गांव निर्जन पाए गए। उनका यह भी कहना था कि राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 2014-15 से 2016-17 के बीच 14,528 गांवों का विद्युतीकरण किया जा चुका था।

शत प्रतिशत गांव विद्युतीकरण, शत प्रतिशत विद्युतीकरण नहीं

हमे यहां ध्यान रखना चाहिये कि शत प्रतिशत गांव विद्युतीकरण एवं शत प्रतिशत विद्युतकरण या सभी को बिजली में अंतर है। दरअसल किसी गांव को तब विद्युतीकृत माना जाता है जब वहां के कम से कम 10 प्रतिशत घरों में बिजली पहुंच जाए। इसका मतलब यही है कि भले ही देश के सभी गांवों में बिजली पहुंच गई हो परंतु देश के सभी परिवारों तक बिजली नहीं भी पहुंची हो। ज्ञातव्य है कि देश में ‘सभी को बिजली’ उपलब्ध कराने हेतु केंद्र सरकार ने ‘प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना’-सौभाग्य आरंभ किया है। इस योजना के तहत देश के सभी घरों तक 31 दिसंबर, 2018 तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई)

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 25 जुलाई, 2015 को पटना में दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना की शुरूआत की थी। इसके निम्नलिखित उद्देश्य हैंः

  1. सभी गांवों का विद्यृतीकरण करना,
  2. किसानों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए फीडर सेपरेशन और अन्य उपभोक्ताओं को नियमित आपूर्ति
  3. सब-ट्रांसमीशन और वितरण नेटवर्क में सुधार ताकि विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में सुधार लाया जा सके और
  4. नुकसान कम करने के लिए मीटरिंग।

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