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सुन्दरवन पारिप्रणाली के लिए संख्यात्मक मॉडलिंग

तट रेखा प्रबंधन के अंतर्गत इस परियोजना का उद्देश्य सुन्दरवन पारिप्रणाली को समझने के लिए आधार रेखा संबंधी सूचना एकत्र करना था। सुन्दरवन डेल्टा में कोलकाता से करीब 130 किमी की दूरी पर स्थित लगभग 20 वर्ग किमीण् क्षेत्र में एक छोटी सी जगह झरखाली के निकट प्राकृतिक संकरी नदी प्रणाली में एक प्रायोगिक परियोजना स्थल का चयन किया गया। 1:5000 पैमाने पर भूमि प्रयोग संबंधी एक मानचित्र तैयार किया गया ताकि हुए क्षेत्र के भू-आकृति विज्ञानी और जनसांख्यिकीय पैटर्न को समझा जा सके। आधार रेखा बाथीमीट्रिक डेटा को क्रीक प्रणाली के फ्लकस और अनुक्रिया का अनुमान लगाने के लिए एकत्र किया गया। संख्यात्मक माडलिंग के लिए चुने गये पांच स्टेशनों पर तापमान,  पीएच मान,  लवणता,  घुलित ऑक्सीजन और नाईट्राइट-नाईट्रोजन जैसे जल गुणवत्ता संबंधी पैरामीटरों का मापन किया गया। पांच स्टेशनों की पीएच मान 7.9 से 8.05 के बीचए तापमान 21 से 21.50 से. के बीच,  लवणता 14.10 से 15.65 पीएसयू के बीच,  घुलित ऑक्सीजन 6.55 से 8.50 एमजी/ली. के बीच तथा नाइट्रेट नाईट्रोजन 11.86 से 17.90 एमओएल/ली. के बीच थी। क्लोरोफिल, पादपप्लवक, प्राणिप्लवक जैसे जीवविज्ञानी पहलुओं पर भी नवम्बर 2008 से जनवरी 2009 के दौरान अध्ययन किए गए। क्लोरोफिल और फियोफायटिन सांद्रता में 1 से 5 स्टेशन तक निरंतर वृद्धि दिखाई दी। पादपप्लवक सेल 2.25.105 की रेंज में थे। प्राणिप्लवक की कुल 25 प्रजातियों को रिकार्ड किया गया। कुल जीवनक्षम गणना में भी स्टेशन 1 से 5 तक वृद्धि देखी गई।

भारतीय तट रेखा के किनारे बहु.जोखिमों की संख्यात्मक मॉडलिंग

तट रेखा प्रबंधन के अंतर्गत यह परियोजना संख्यात्मक समीकरणों का प्रयोग करके निर्मित सुनामी मॉडलों के प्रयोग द्वारा निचले स्थानोंए घनी आबादी वाले तटीय क्षेत्रों में सुनामी अथवा तूफान महोर्मियों के संभावित खतरों का अध्ययन करने के लिए शुरू की गई थी। संख्यात्मक मॉडलिंग आंधी-तूफान और जलमग्न होने की संभावनाओं का पता लगाने में लाभदायक होती है।

संख्यात्मक मॉडलिंग का उपयोग सुनामी के बढ़ने और इससे विस्तृत भू-भागों के साथ होने वाली परस्पर क्रिया का अनुकरण करने के लिए किया जाता है। पहले आए भूकम्पों के स्रोतोंए उनके स्रोत के पैरामीटरों तथा संभावित ऐसे सुनामी पैदा करने वाले स्रोतए जिनसे भारतीय तट रेखा को खतरा हैए की पहचान की गई। इन मॉडलों की कुड्डालोर जैसे चुनिंदा स्थानों पर 80 प्रतिशत सटीकता की पुष्टि की गई। प्रथम चरण में अध्ययन के लिए प्रत्येक तटीय राज्य में कुछ स्थानों का चयन किया गया। तथापिए इसके बाद के चरणों में उच्च विभेदकता वाले उत्थापन और बाथीमीट्रिक डेटा का अधिग्रहण करने के अनुसारए सम्पूर्ण तटरेखा को कवर कर लिया गया।

एक बार पुष्टि कर लिए जाने के बाद संख्यात्मक मॉडलिंग का प्रयोग पहले सुनामी के दौरान जलमग्न हुए क्षेत्र के परिदृश्य तैयार करने और उनका अनुरूपण करने के लिए किया गया। काल्पनिक रूप से अधिकतम विनाश की ऐसी बदतरीन स्थिति के परिदृश्य का अनुरूपण भी किया गया जो सुनामी आने के परिणामस्वरूप हो सकती है। परिणामों से स्पष्टतः पता चलता है कि 1881 के बाद कार.निकोबार स्रोत के बाद 26 दिसम्बर 2004 को सुमात्रा में आए भूकंप के दौरान सबसे अधिक जल आप्लावन हुआ था। तट रेखा प्रबंधन हेतु मॉडल पूर्वानुमान के आधार परए पहले के विभिन्न सुनामी जनित स्रोतों के आप्लावित होने की सीमा को दर्शाने के लिए बड़े पैमाने पर संवेदनशीलता संबंधी मानचित्र तैयार किए गए। इन आप्लावन संबंधी मानचित्रों के अलावाए संवेदनशीलता क्षेत्रों में तीव्रता के साथ पानी बढ़ने की ऊंचाई दर्शाने के लिए जलस्तर मानचित्र भी तैयार किए गए हैं। परियोजना को इकमाम-परियोजना निदेशालयए मद्रास विश्वविद्यालय और सीईएसएसए त्रिवेन्द्रम द्वारा कार्यान्वित किया गया।

तट रेखा प्रबंधन के अंतर्गत तमिलनाडु में पुल्लिकट से नागापट्टनमए कन्या कुमारी और आंध्र प्रदेश में ओंगलेए कृष्णापट्टनम और कवाली के बीच की तट रेखा पर स्थित पट्टियों के लिए ग्राम.वार आप्लावन क्षेत्र के मानचित्र तैयार किए गए। अन्य स्थानों के लिए यद्यपि पहले आए भूकम्पों के परिदृश्यों के लिए मॉडल बनाने का कार्य पूरा कर लिया गया हैए तथापि ये कार्य आरटीके सर्वेक्षण का प्रयोग करते हुए उत्थापन डेटा से ही किया गया क्योंकि एएलटीएम डेटा उपलब्ध नहीं थे। चेतलट के लिए सुनामी आप्लावन संबंधी मानचित्र बनाए गए हैं तथा सीइर्एसएसए त्रिवेन्द्रम द्वारा लक्षद्वीप के द्वीपों के लिए दो परिदृश्यों (अ) अण्डमान-दिसम्बर 2004 में सुमात्रा में आए भूकंप और (ब) 1945 में मकरान में आए भूकम्प के लिए सुनामी आप्लावन संबंधी मानचित्र बनाए हैं।

इकमाम परियोजना निदेशालय में तमिलनाडु के तटीय जिलों के तट रेखा प्रबंधन लिए प्रत्येक गांव के लिए 1:5000 के संवेदनशीलता संबंधी मानचित्र तैयार किए गएए जिनमें सुनामी आने की स्थिति में प्रभावित होने वाले क्षेत्रों को दर्शाया गया है।

तूफान महोर्मियों की संख्यात्मक मॉडलिंग : तटीय आंध्र प्रदेश के लिए मामले का अध्ययन

चक्रवातों की संभावना वाले तटीय क्षेत्रों में तूफान के कारण आने वाली महोर्मियों और जलमग्न होने की स्थिति का पूर्वानुमान लगाने के लिए तट रेखा प्रबंधन के अंतर्गत इस परियोजना को शुरू किया गया है। आईआईटीए दिल्ली द्वारा इस परियोजना को कार्यान्वित किया गया है।

परिमित अवयव और परिमित अन्तर वाली दोनों संख्यात्मक मॉडलिंग का प्रयोगए भारत की पूर्वी तट रेखा पर स्थित आन्ध्र प्रदेश के तटों को प्रभावित करने वाले उष्णदेशीय चक्रवातों द्वारा उत्पन्न तूफान महोर्मियों और उनसे जुड़ी धाराओं का अनुरूपण करने के लिए किया गया।

मॉडल से अनुरूपण की गई समुद्री सतहों के ऊंचा उठने की मोटे और अधिक सूक्ष्म आकाशीय विभेदकों से तुलना करने से पता चलता है कि स्थानीय बाथीमीट्री के साथ.साथ महोर्मियों का ठीक.ठीक पता लगाने के लिए तट रेखा के निकट ग्रिड विभेदन बहुत कठिन है। संख्यात्मक मॉडलिंग प्रयोगों से यह भी पता चलता है कि महोर्मियों की संगणना करने के लिए आईआईटीडी तूफान महोर्मि मॉडल की तुलना में एडीसीआईआरसी मॉडल काफी मजबूत है क्योंकि इसमें तट  रेखा प्रबंधन का बेहतर निरूपण होता है।

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