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वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन व मौसम में परिवर्तन

पृथ्वी की सतह के तापमान का क्रमिक रूप से बढ़ना वैश्विक उष्णता है जिसके बारे में माना जाता है कि यह ग्रीन हाउस गैसों के प्रभाव के कारण होता है और इससे वैश्विक प्रतिमानों पर मौसम में परिवर्तन होता है। विगत काल में वैश्विक उष्णता प्राकृतिक प्रभावों के फलस्वरूप हुई थी, परन्तु इस शब्द का सर्वाधिक प्रयोग ग्रीन हाउस गैसों के बढ़ते हुए उत्सर्जन के फलस्वरूप होने वाली उष्णता की पूर्वकथन के संदर्भ में किया गया है। पृथ्वी के वातावरण में 78 प्रतिशत नाइट्रोजन, 21 प्रतिशत ऑक्सीजन, 1 प्रतिशत ट्रेस गैसों {आर्गेन 0.9 प्रतिशत, .01 में नियोन, क्रिप्टॉन, एक्सीनॉन, हाइड्रोजन, जल वाष्प और ग्रीन हाउस गैसें (जीएचजी अधिकतम 0.04 प्रतिशत) शामिल हैं } का मिश्रण है। इन्हें ट्रेस गैस इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये बहुत कम मात्रा में विद्यमान होती हैं। जीएचजी में 6 प्रतिशत नाइट्रस ऑक्साइड, 13 प्रतिशत मीथेन, 5 प्रतिशत फ्लोरोकार्बन और 76 प्रतिशत कार्बनडाईऑक्साइड होता है।...

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