भूगोल और आप | भूगोल और आप फ्री आर्टिकल |

भौगोलिक विचारधारा एक नज़र में

यूनानीः पूर्व ऐतिहासिक विचारों के अग्रगामी
प्रमुख विषेशताएँ
♦ पाँचवीं से तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के बीच भूमध्य सागर और युगज़िन सागर (काला सागर) के विभिन्न भागों में यूनानी बस्तियाँ स्थापित थीं।

♦ पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व में मिलेटस (Miletus) तथा युगज़िन सागर के पास स्थित अन्य बस्तियाँ भौगोलिक खोजों के मुख्य केन्द्र बन गए थे।

♦  लीबिया के पश्चिमी तट के सहारे हानो की आरम्भिक खोज यात्रा और सिकन्दर के पूर्व की ओर प्रस्थान ने दूर के देशों के बारे में यूनानियों को वास्तविक ज्ञान उपलब्ध कराया।
♦ सिकन्द्रिया में प्रसिद्ध संग्रहालय और पुस्तकालय की स्थापना ने यूनानी विद्वानों को ज्ञानार्जन के लिए प्रेरित किया। इसी संग्रहालय और पुस्तकालय में इरेटोस्थनीज (Eratosthenes) और हिपार्कस (Hipparchus) ने पृथ्वी को नापने, उसके आकार एवं परिधि के संबंध में वैज्ञानिक अवलोकन किये थे।
अब हम प्रमुख यूनानी भूगोलवेत्ताओं के बारे में संक्षेप में जानेंगे।

होमर (Homer)
♦ ईलियाड (Illiad) एवं ओडिसी (Odyssey) दो महाकाव्य होमर ने रचे।
♦ इन महाकाव्यों में ट्रोजन युद्ध (1280 एवं 1180 ई0 पू0) का वर्णन है तथा इनमें उस समय के ज्ञात संसार की ऐतिहासिक भूगोल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी उपलब्ध है।
♦ उसके अनुसार आकाश एक ठोस नतोदर धरातल वाला है और उसका विस्तार पृथ्वी के बराबर है तथा वह लम्बे-लम्बे खम्भों पर टिका हुआ है।
♦ होमर ने चार दिशाओं से आने वाली पवनों का भी वर्णन किया हैः
बोर्स (Bores) उत्तर से आने वाली तेज व ठण्डी पवन, जिसमें आकाश स्वच्छ रहता है।
यूरस (Eurus) उष्ण और मन्द पूर्वी पवन
– नोटस (Notus) दक्षिणी पवन
– जेफाइरस (Zephyrus) पश्चिम से आनेवाली डरावनी, सुगंधित एवं शक्तिशाली पवन
♦ पवनों के अतिरिक्त अपनी कविताओं में प्लीडेज, ओरियन, हायड्रा, बूट्स तथा ग्रेट बेयर आदि तारापुंजों का भी विवरण दिया है।
♦ होमर को भूमध्यसागर, कालासागर और मारमारा सागर के बारे में पर्याप्त ज्ञान था, लेकिन वह एशिया, अफ्रीका तथा यूरोप के बारे में अनभिज्ञ था।

थेल्स (Thales)
♦ थेल्स उत्तरी आयोनिया में मियण्डर नदी के मुहाने पर स्थित मिलेटस नगर का रहने वाला था।
♦ थेल्स ने मिस्र में नील नदी के डेल्टा का अध्ययन किया तथा बताया कि नील नदी दो नदियों – बाहेल गजल (White Nite) तथा बाहेल अजरक (Blue Nite) से मिलकर बनी है।
♦ थेल्स को यूनानी दर्शनशास्त्र का निर्माता कहा जाता है। उसका संबंध ‘आयोनिक स्कूल ऑफ फिलोसॉफी’ से था।
♦ थेल्स ने अपनी मिश्र यात्रा पर कुछ पादरियों द्वारा कोणों के आधार पर रेखाओं को नापने एवं क्षेत्रफल निकालने से प्रभावित होकर ज्यामिति के अनेक प्रमेयों (Theorems) की उत्पत्ति की थी।
♦ वह एक व्यवसायी एवं यात्री था जिसका कार्यकाल सातवीं शताब्दी ईसापूर्व माना जाता है।
♦ उसके अनुसार पृथ्वी पानी में तैरती हुई एक तश्तरी है।

एनेक्सीमैंडर (Anaximander)
♦ ऐनेक्सीमैंडर मिलेटस नगर में थेल्स का शिष्य था।
♦ उसने नोमोन (ळदवउवद) नामक एक यंत्र का इजाद किया। यह सूर्यघड़ी (Gnomon) के समान होता था तथा जिसकी सहायता से मध्याह्न निश्चित किया जा सकता है। मध्याह्न के समय इस पर छाया सबसे छोटी होती है। उसे नोमोन निर्माण का ज्ञान बेबीलोन से मिला था।
♦ वह प्रथम व्यक्ति था जिसने विश्व का मानचित्र मापक पर बनाया।
♦ थेल्स के साथ एनेक्सीमैंडर को गणितीय भूगोल का संस्थापक माना जाता है।
♦ एनेक्सीमैंडर ने सर्वप्रथम जीवों की उत्पत्ति के बारे में एक सिद्धान्त का प्रतिपादन किया तथा बताया कि समस्त जीवधारियों की उत्पत्ति जल में हुई है, तत्पश्चात् विभिन्न नस्लों का विकास हुआ तथा वे विभिन्न स्थानों पर वितरित हुईं।

हिकेटियस (Hecataeus)
♦ एनेक्सीमैंडर की तरह हिकेटियस भी मिलेटस वासी था।
♦ उसकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘जस पीरियड्स (Ges- Periods) अर्थात् ‘पृथ्वी का वर्णन’ थी जो सम्भवतः छठी शताब्दी के अन्त में प्रकाशित हुई थी।
♦ पीरियड्स विश्व का प्रथम क्रमबद्ध वर्णन है और इसी लिए हिकेटियस को ‘भूगोल का पिता’ (Father of Geography) भी कहा जाता है।
♦ पीरियड्स में भूमध्यसागर के द्वीपों और जलसंधियों का वर्णन है।
♦ हिकेटियस का कार्य दो पुस्तकों में विभाजित था। प्रथम भाग में यूरोप के संबंध में भौगोलिक जानकारी दी गई थी तथा दूसरे में अफ्रीका तथा एशिया का वर्णन था।
♦ उसने एशिया में विशेष रूप से ईरान तथा भारतवर्ष के बारे में जानकारी दी, जिसमें यहाँ की जनजातियों तथा नदियों का विवरण दिया। उसने सिन्धु तथा दजल-फरात को एशिया की प्रमुख नदियाँ बताई। अफ्रीका को लिबिया के नाम से वर्णित किया।
♦ उसके अनुसार पृथ्वी चपटी एवं गोलाकार है।

हेरोडोटस (Herodotus)
♦ हेरोडोटस ने प्रसिद्ध पुस्तक ‘हिस्टेरोग्राफी’ लिखी, जिसमें ऐतिहासिक एवं भौगोलिक तथ्यों का सम्मिलित समावेश है। इसमें नदियों, नहरों, पर्वतों, पठारों, विश्व की प्रमुख बास्तियाँ, विभिन्न प्रदेशों की स्थिति आदि का विस्तार से वर्णन है। वह अपने समय के ऐतिहासिक भूगोलवेत्ता रहे। ऐतिहासिक तथ्यों का व्यवस्थित क्रम में उल्लेख सर्वप्रथम हेरोडोटस ने ही किया था जिस कारण इनको ‘इतिहास’ का पिता कहा गया।
♦ उसके अनुसार ‘समस्त इतिहास का भौगोलिक दृष्टि से अध्ययन किया जाना चाहिए और समस्त भूगोल को इतिहास की तरह व्यवहार में लाना चाहिए।
♦ हेरोडोटस का जन्म हेलीकारनेसस (Halicarnessus) में ईसा पूर्व पाँचवीं शताब्दी में हुआ था लेकिन मुख्यतः वह एथेन्स नगर में रहा जो हेलेनिक संस्कृति का प्रमुख केन्द्र था।
♦ वह एक महान यात्री था। उसके लेख उसके आंखों देखी विवरण पर आधारित होते थे। पश्चिम में उसने इटली की यात्रा की और मारमरा तथा बॉसफोरस जलसन्धियों से होकर युगज़िन सागर पार करते हुए रूसी स्टेप प्रदेश में पहुंचा। पूर्व की ओर वह परशियन साम्राज्य में पहुंचा। दक्षिण की ओर उसने मिश्र की यात्राएं कई बार की।
♦ हेरोडोटस प्रथम भूगोलवेत्ता था जिसने कैस्पीयन सागर को आन्तरिक सागर माना।
♦ उसके अनुसार नील की घाटी विशेषकर उसके डेल्टा का निर्माण इथिओपिया से नदी द्वारा लाई गई गाद और मृतिका से हुआ। उसने सर्वप्रथम ‘डेल्टा’ शब्द प्रस्तावित किया।
♦ हेरोडोटस विश्व भूखण्ड को तीन महाद्वीपों यूरोप, एशिया और लीबिया (अफ्रीका) में विभाजित करने वाला प्रथम भूगोलवेत्ता था।
♦ उसने डेन्यूब नदी को विश्व की सबसे बड़ी नदी माना।

इरेटोस्थनीज (Eratosthenes)
♦ इरेटोस्थनीज को प्रथम वैज्ञानिक भूगोलवेत्ता की संज्ञा दी जा सकती है जिसने विषुवत रेखा की लम्बाई विश्वस्त मूल सिद्धान्तों के आधार पर ज्ञात करने का प्रयास किया था।
♦ इरेटोस्थनीज का जन्म यूनानी वस्ती सिरिन में 276 ई. पू. में हुआ था। एथेन्स में शिक्षा पूरी करने के बाद उसे मिश्र के शासक टालमी यूरेट्स ने सिकन्द्रिया के पुस्तकालय का अध्यक्ष नियुक्त किया। उस काल में यह पद शिक्षा का सर्वोच्च सम्मान माना जाता था।
♦ उसके अनुसार पृथ्वी की आकृति गोलाभ है तथा वह ब्रमाण्ड के मध्य में स्थित है जिसके चारों ओर खगोलीय पिण्ड चौबीस घंटे में चक्कर लगाते हैं।
♦ उसने नोमोन (Gnomon) की सहायता से विषुवत रेखा की सही लम्बाई ज्ञात की।
♦ पृथ्वी से सूर्य और चन्द्रमा की दूरी भी निश्चित करने का प्रयास इरेटोस्थनीज ने किया था जिसका परिणाम यथार्थ से बहुत निकट है।
♦ उसने भूगोल पर ‘ज्योग्राफिया’ ग्रन्थ लिखा जिसमें उसने प्रथम बार गणितीय आधार पर भूगोल का विवरण प्रस्तुत किया।
♦ उसने विभिन्न अंक्षाशों और देशान्तरों को निश्चित करने का प्रयास किया जिसके चलते उसे ‘भू-गणित का पिता’ (Father of Geodesy) कहा जाता है।
♦ इरेटोस्थनीज द्वारा लिखी गई पुस्तक में एक्युमेन (मनउमदम) को वास योग्य विश्व कहा गया है।
♦ उसने दो प्रकार के विभाजन स्वीकार किये- एशिया, यूरोप और लीबिया (अफ्रीका) तथा पांच कटिबंध- एक उष्ण कटिबन्ध, दो शीतोष्ण कटिबंध तथा दो शीत कटिबंध।

हिपार्कस (Hiparchus)
♦ इरेटोस्थनीज की मृत्यु के पश्चात हिपार्कस को सिकन्द्रिया के पुस्तकालय का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
♦ हिपार्कस एक खगोलशास्त्री था जिसने अंक्षाशों के आधार पर विश्व को क्लाईमाटा (अक्षांश की पेटियों) में विभाजित किया।
♦ वह प्रथम विद्धान था जिसने वृत्त को 3600 अंशों में असीरियन गणित के आधार पर विभाजित किया।
♦ अक्षांश और देशांतर निश्चित करने के लिए हिपार्कस ने एक उपकरण ।ेजतवसंइम का आविष्कार किया था। यह नोमोन की अपेक्षा अधिक उपयोगी था। यहां तक कि यह तंत्र खुले सागरों में भी लाया जा सकता है। ।ेजतवसंइम के कारण धु्रव तारे के कोण का अवलोकन कर समुद्रों में अक्षांशों का नापा जाना संभव हो सका।
♦ त्रिविभीय मंडलाकार को द्विविभीय मंडलाकार में परिवर्तित करने का श्रेय भी हिपार्कस को जाता है।
♦ उसने लम्बरेखीय (Orthographic) तथा समरूपीय (Stereographic) नामक दो प्रदेशों की अभिकल्पना भी की थी।

भूगोल के क्षेत्र में यूनानियों के महत्वपूर्ण योगदान का सारांष
♦ यूनानियों ने गणितीय, भौतिक, ऐतिहासिक तथा प्रादेशिक भूगोल के क्षेत्र में भूगोल का यथार्थवादी आधार प्रस्तुत किया।
♦ गणितीय भूगोल का विकास थेल्स (590 ई0 पू0), एनेक्सीमैंडर (611 ई0 पू0) तथा अरस्तु (384-322 ई0 पू0) ने किया था किन्तु इसको चरमोत्कर्ष पर इरेटोस्थनीज (276-194 ई0 पू0) ने पहुँचाया।
♦ यूनानियों के लेखों में पर्वतों, डेल्टा निर्माण, पवन मौसम, परिवर्तन वर्षा, भूकम्प तथा उनके कारण ज्वालामुखी और भू-आकृति लक्ष्णों में बदलाव के बारे में अनेक संदर्भ मिलते हैं।
♦ अगारथारचाइड्स (।हंतजींतबीपकमे) ने इथियोपिया में स्वर्ण अयस्क के पाये जाने का वर्णन किया है।
♦ प्लेटो ने अतीका (यूनान) की उपजाऊ भूमि का वर्णन किया है।
♦ पोसीडोनियस ने एक पुस्तक ‘दि ओशन्स’ (ज्ीम व्बमंदे) लिखी थी और उसे सागरीय विज्ञान का विशेषज्ञ माना जाता था।
♦ हेरोडोटस ने लाल सागर और मेटियाक की खाड़ी में ज्वार-भाटा के तथ्यों का निरीक्षण किया था।
♦ अरस्तु ने अपनी पुस्तक ‘मेटरियोलोजी’ में ज्वार-भाटा संचलन का निरीक्षण किया है, लेकिन उसने ज्वार-भाटे का कारण हवा माना।
♦ नेयरकस ने अरब सागर तथा पीथियस ने अन्धमहासागर में ज्वार-भाटा का निरीक्षण किया था। पीथियस ने ज्वार के उत्पन्न होने के कारणों को निश्चित करने और चन्द्रमा की गति से दैनिक ज्वार-भाटा का सम्बंध स्थापित किया।
♦ वह पोसीडोनियस था जिसने यह बताया कि नये चन्द्रमा के दिन जब सूर्य एवं चन्द्रमा एक सीध में होते हैं तो पूर्ण चन्द्रमा वाले दिन ज्वार दीर्घ ज्वार (Spring Tides) होते हैं, जबकि प्रथम एवं अंतिम चतुर्थांश में ज्वार सर्वाधिक नीचे, लघु ज्वार (छममच ज्पकमे) होते हैं।
♦ पोसिडोनियस ने भौतिक भूगोल को तर्कसंगत विधि से विकसित करने का सराहनीय कार्य किया जिसके लिए उसे ‘भौतिक भूगोल का पिता’ कहते हैं।
♦ यूनानियों ने होमर के काल से ही चार मुख्य पवनों की पहचान की जिनके लक्षण और दिशाएं भिन्न थीं।
♦ यूनानियों ने तापमान और विश्व के मानव प्रदेशों के बीच संबंध स्थापित किया था।

Post a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.