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अपनी रक्षा स्वयं करें हृदयाघात के दौरान

मान लीजिए शाम के सवा छह बजे हैं और आप दिन भर कड़ा परिश्रम करने के बाद वाहन अकेले चलाकर घर लौट रहे हैं। वास्तव में आप थक गए हैं तथा तनाव से भरे हुए हैं। अचानक आप अपनी छाती में तेज दर्द का अनुभव करते हैं जो आपके बांह और आपकी जबड़े तक फैल जाता है।

आप अपने नजदीकी अस्पताल से कुछ ही पर हो सकते हैं लेकिन दुर्भाग्यवश आपको यह नहीं पता कि आप उतनी दूर तक पहुंच पायेंगे या नहीं। आपको कार्डियोपलमोनरी रिसस्टीशन (सीपीआर) एक संकटकालीन चिकित्सा प्रक्रियाए का प्रशिक्षण दिया गया है पर कोर्स इन्स्ट्रक्टर ने आपको यह नहीं बताया कि आप अपनी रक्षा स्वयं करें।

यदि आप अकेले भी होंए तो हृदयाघात से अपनी रक्षा स्वयं कर सकते हैं। चूंकि बहुत सारे लोग अकेले होते हैंए जब उन पर हृदयाघात होता हैए किसी  सहायता के बिना लगभग अचेत व्यक्ति जिसकी हृदय की धड़कन असामान्य रूप से तेज हो गयी हो, उस पर बेहोशी छाने लगती है तथा पूरी तरह से अचेत हो जाने से पहले उसके पास केवल 10 सेकंड का समय बाकी रह जाता है। ऐसी स्थिति में पहला कदम तो यह है कि वह घबराये नहीं। दूसरा कदम है, वह बार.बार जोर.जोर से खांसना शुरू कर दे। प्रत्येक बार खांसने के बाद तेज सांस लेनी चाहिएए गहराई तक खांसना चाहिए तथा देर तक खांसना चाहिए जब छाती के भीतर से थूक निकल रहा हो। प्रत्येक दो सेकंड के अन्तराल पर इसी प्रकार खांसते रहना चाहिए जब तक सहायता करने वाला व्यक्ति नहीं आ जाये या फिर हृदय की धड़कन फिर से सामान्य न हो जाये। इस तरीके से फेफड़े के भीतर सांस के माध्यम से ऑक्सीजन पहुंचने में सहायता मिलती है तथा खांसने के दौरान हृदय में सिकुड़न होने से रक्त का संचार बना रहता है। सिकुड़े फेफड़े का दबाव हृदय पर पड़ने से हृदय की गति सामान्य होने में मदद मिलती है। इस प्रकार अपनी रक्षा स्वयं करने से आपको अस्पताल पहुंचने के लिए बहुमूल्य समय मिल जाता है या फिर कोई सहायता मिलने तक आप स्वयं को बचा पाते हैं।

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