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भारत में शरणार्थी समस्या : एक अकल्पित आघात

विविधतापूर्ण संस्कृति वाला भारत एक ऐसा देश है जो अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करते हुए अपनी विभिन्न प्रकार की संस्कृतियों की रक्षा वर्षों से करता आ रहा है। कालक्रम के अनेक खण्डों में भारत की संस्कृति, सभ्यता और जीवनशैली पर अनेक प्रकार के आघात हुए हैं। विदेशी आक्रमण के कारण भारत ने अनेक बार कुठाराघात सहा है।

भारत में शरणार्थी समस्या

परन्तु भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के समय से ही एक अकल्पित समस्या का आक्रमण भारत की संस्कृति पर होता आ रहा है, जिसके कारण भारत के नागरिकों का जीवन तथा भारत सरकार की विकास परक योजनाएं दोनों प्रभावित हो रहे हैं। यह है भारत में पड़ोसी देशों से भागकर आने वाले नागरिकों द्वारा जनित शरणार्थी समस्या। कभी इसके कारण राजनैतिक होते हैं, कभी इसके पीछे धार्मिक अथवा साम्प्रदायिक उन्मांद होता है तो कभी भौगोलिक परिस्थितियाँ, यथा- जलवायु, पर्यावरण, दैवीय अथवा प्राकृतिक आपदा, बेरोजगारी, भुखमरी आदि इसका कारण बन जाते हैं।

शरणार्थी समस्या : एक आघात

भारत के पड़ोसी देशों में घटित होने वाले घटनाक्रमों से भारत का सामाजिक पर्यावरण प्रभावित होता है। जब अवांछित रूप से पड़ोसी दशों के नागरिक भारत में प्रवेश करते हैं तो अनेक प्रकार की अकल्पित समस्याएँ जन्म लेती हैं। जहाँ-जहाँ पहुँचते हैं ये शरणार्थी, समस्या अनेक रूपों में प्रकट होती है। आवास की समस्या, खाद्य रसद एवं पेयजल की समस्या, इनके मानवीय समायोजन की समस्या, स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा की समस्या क्योंकि बेरोजगारी के कारण शरणार्थी अक्सर अनुचित तथा अपराधिक गतिविधियों में लिप्त हो जाते हैं। महिलाएंँ व पुरूष दोनों की संलिप्तता ऐसी गतिविधियों में पायी गयी है। शरणार्थी समस्या को अकल्पित आघात इसलिये कहा जा सकता है क्योंकि किसी भी देश की सरकार को यह पता नहीं कि दूसरे देश के नागरिक कब अवैधरूप से सीमा पार करके उसकी सीमा में प्रवेश कर जायेंगे और यत्र-तत्र फैल जायेंगे। किसी राज्य की सरकार को भी यह पता नहीं होता कि भारत में अवैध रूप से घुसे शरणार्थी कब उसके राज्य की सीमा में प्रवेश कर जायेंगे और शासन व्यवस्था के लिए मुश्किलें खड़ी कर देंगे।

शरणार्थी समस्या : कौन जिम्मेदार

भारत में पाकिस्तान से भाग कर आने वाले वहां के अल्पसंख्यक समुदाय के लोग हैं। ये लोग वहां की कट्टरवादी मज़हबी सोच के कारण साधारण जीवन जीने में भी अनेक प्रकार की मुश्किलों का सामना करते हैं और जीवन निर्वाह में आने वाली बाधाओं से परेशान होकर भारत की सीमा में अक्सर सपरिवार अवैध रूप से प्रवेश कर जाते हैं।  चीन से विवाद के कारण तिब्बत से भी भारत में लाखों शरणार्थी आये हैं। पड़ोसी देशों नेपाल, बंग्लादेश और बर्मा से भी भारत की सीमा में प्रवेश करने वाले शरणार्थियों की संख्या बहुत ज्यादा है। परन्तु इन तीन देशों से आने वालों के पीछे राजनैतिक अथवा साम्प्रदायिक कारण कम, वहां जीवन निर्वाह से सम्बंधित भौगोलिक कारण प्राकृतिक आपदाएँ, भुखमरी, महामारी, बेरोजगारी आदि अधिक जिम्मेदार रहे हैं। इस तथ्य की अवेहलना नहीं की जा सकती। एक अनुमान के अनुसार भारत में इस समय 55 लाख शरणार्थी हैं जो अलग-अलग देशों से आये हैं।

शरणार्थी समस्या : भौगोलिक कारण

किसी क्षेत्र में आने वाली बाढ़ या सूखा जैसी प्राकृतिक आपदा, किसी किस्म की महामारी का फैलना अक्सर मनुष्य को एक स्थान छोड़कर दूसरे स्थान की ओर पलायन करने पर मजबूर कर देते है। घर-सम्पत्ति, पूँजी के साथ ही आपदाग्रस्त लोगों का निजी व्यवसाय भी उनके हाथ से छूट जाता है। किसी दूसरे स्थान अथवा दूसरे देश की शरण लेने के कारण अर्थाभाव तथा बेरोजगारी के कारण अपने लिए भोजन, पानी तथा कपड़ा आदि मूलभूत जरूरतें पूरी करने के लिए अनैतिक कार्यों में लिप्त होना कई बार इनकी विवशता बन जाती है। तब ये शरणार्थी समस्या बन जाते हैं स्थानीय प्रशासन के लिए ऐसे में प्रशासन इनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने तथा बल प्रयोग के लिए मजबूर हो जाता है।

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