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जैव विविधता का भी रक्षक सशस्त्र सीमा बल

भारत के पड़ोसी देशों के साथ खुली हुई सीमाओं की रक्षा के लिए सशस्त्र सीमा बल को तैनात किया जाता है। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की कुल 629 सीमा चौकियों और 229 बीओपी (बॉर्डर आउट पोस्ट) की तैनाती वर्गीकृत वन्य क्षेत्रों में है। भारत की सीमा की सुरक्षा करने के अलावा एसएसबी अपनी नियुक्ति वाले वन्य क्षेत्रों में वन्य जीवों का संरक्षण कर जैव विविधता का भी संरक्षक बन गया है।

विगत 22 सितम्बर को सशस्त्र सीमा बल द्वारा नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में जैव विविधता संरक्षण पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार का विषय था, ‘वन्य जीवन अपराधों से निपटने में सुरक्षा बलों की भूमिका’। इस अवसर पर एसएसबी की महानिदेशक श्रीमती अर्चना रामासुन्दरम ने बताया कि वर्ष 2017 के पहले आठ महीनों में वन्य जीवन अपराध से सम्बन्धित 85 मामले एसएसबी के द्वारा दर्ज किये गये और 95 तस्करों को गिरफ्तार किया गया। वन्य जीवों का वध करके जैव विविधता और पर्यावरण को हानि पहुंचाने वाले 60 मामलों में लिप्त 62 अपराधियों को एसएसबी द्वारा बंदी बनाया गया।

सशस्त्र सीमा बल के जवानों द्वारा किये गये वन्य जीवन संरक्षण के इन प्रयासों के चलते सैकड़ों वन्यजीवों की विभिन्न प्रजातियों को बचाया गया और जैव विविधता का संरक्षण हुआ। इससे पर्यावरण की भी सुरक्षा हुई। एसएसबी द्वारा बचाये गये वन्यजीवों में सेंडबो साँप और टोका छिपकली प्रमुख हैं। अपनी कार्यवाही के दौरान एसएसबी ने हिरण, कछुआ, खरगोश व कबूतर के शरीर के अंगों तथा हाथी दाँतों को तस्करों के पास से बरामद कर जब्त किया।

एसएसबी भारत-नेपाल की 1751 किलोमीटर (कि.मी.) लम्बी खुली हुई सीमा तथा 699 कि.मी. लम्बी भारत-भूटान सीमा को मिलाकर कुल 2450 कि.मी. लम्बी अंतर्राष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा का भारत संभालती है। सीमा से सटे हुए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, सिक्किम, असम और अरूणाचल प्रदेश के वन्यजीवन से आबद्ध कठिन जीवन परिस्थितियों वाले इलाकों में इसकी तैनाती है। खुली सीमाएं जहां अवैध व्यापार करने वाले तस्करों – पशु तस्करों के लिए वन्य जीवों के लिए आवागमन का आवागमन का आसान मार्ग हैं, वहीं क्षेत्र के वन्य जीवों के लिए असुरक्षा का कारण भी हैं। तस्करों का इन सीमाओं में प्रवेश वन्यजीवों के जीवन के लिए खतरा बन जाता है। तस्कर एवं अन्य लोग मांसाहारी भोजन प्राप्ति की इच्छा से वन्य जीवों की हत्या कर देते हैं। पशुओं के अंगों का व्यापार करने वाले पशु तस्कर अवैध रूप से धन प्राप्ति की लालसा में वन्य जीवों को मार डालते हैं। इन गतिविधियों के चलते सीमावर्ती इलाकों की जैव विविधता विगत कई वर्षों से नष्ट होती रही है। इसको बचाने में एसएसबी की भूमिका को नजरअन्दाज नहीं किया जा सकता है।

जैव विविधता का संरक्षण पर्यावरण की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। इसके संरक्षण के लिए किये जा रहे सभी प्रकार के प्रयास नैतिक और वैधानिक रूप से मान्य हों और संरक्षण का भार उठाने वाले सामाजिक रूप से पुरस्कृत किये जायें, यह आवश्यक है। तब ही जैव विविधता के संरक्षण के प्रयासों में वृद्धि होगी और पर्यावरण की सुरक्षा की जा सकेगी।

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