भूगोल और आप

समुद्र निश्चित करता है जलवायु का स्वरूप व प्रभाव

सूचना-प्रौद्योगिकी के वर्तमान युग में आधुनिक भौगोलिक प्रविधियों यथा-‘दूर संवेदन’, भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) अंतः जलीय फोटोग्राफी आदि से लैस समुद्र विज्ञान एवं मौसम विज्ञान ने समुद्र एवं जलवायु के गूढ़ रहस्यों एवं संबंधों को सुलझाने का सफल प्रयास किया है। समुद्र द्वारा विभिन्न आयामों-वैश्विक, महाद्वीपीय, क्षेत्रीय और स्थानीय स्तर पर जलवायु को कई प्रकार से बड़े पैमाने पर प्रभावित...

भूगोल और आप

सागरीय जल का तापमान तथा जल में उपस्थित लवणता

पृथ्वी के धरातल के समान ही सागरीय जल को भी तापमान सूर्यातप से प्राप्त होता है। सागरीय जल का तापमान -50C से 330C तक पाया जाता हैं। लेकिन सागरीय जल का औसत दैनिक तापान्तर लगभग 10C तक अर्थात नगण्य होता है क्योंकि जल धीरे-धीरे गर्म तथा धीरे-धीरे ठण्ड़ा होने के करण तापान्तर बहुत कम पाया जाता है। सागरीय जल के तापमान पर सूर्य की उत्तरायण एवं दक्षिणायन स्थिति का प्रभाव पड़ता हैं। उत्तरी गोलार्द्व में...

भूगोल और आप

एनआरडीएमएस द्वारा ग्राम सूचना प्रणाली बनाने का लक्ष्य

भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के सभी क्षेत्रों में तेजी से विकास कर रहा है। वे घटनायें, जो प्राकृतिक और मानव संसाधनों के अन्वेषण, विकास और प्रबंधन पर एक महत्वपूर्ण रूप से ध्यान केंद्रित कर रही है, निम्न हैं- i. प्रसारित डेटा की एक विशाल राशि का निर्माण ii. स्थिरता, सामाजिक भागीदारी, प्रासंगिकता और आर्थिक विकास के लिए बहुत कम चिंता वाले कई क्षेत्रों में असंतुलित विकास। भारत में 6,40,867 से...

NRDMS # भूगोल और आप

भूस्खलन के प्रभावों को मिटाने में एनआरडीएमएस कैसे मदद कर रहा है

हर साल दुनिया भर के सैकड़ों लोग भूस्खलन के लिए अपना जीवन खो देते हैं। 5 फरवरी, 2018 को जकार्ता, इंडोनेशिया में आये सबसे हालिया भूस्खलन ने हजारों लोगों को प्रभावित किया और दो मृत और आठ घायल हुए (एबीसी न्यूज, 6 फरवरी, 2018) । भारत में भी बहुत से लोग भूस्खलन के शिकार हुए हैं। हाल ही में अगस्त 2017 में, हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में एक भूस्खलन ने 46 लोगों (टीओआई, 2017) के जीवन को खत्म कर दिया था। पुणे में मालिन...

NRDMS # भूगोल और आप

जीआईएस का उपयोग करते हुए आक्रमक प्रजातियों के प्रसार को समझना

पृथ्वी पर करीब 8.7 मिलियन की विभिन्न प्रजातियां हैं, भूमि पर 6.5 मिलियन प्रजातियां और पानी के नीचे 2.2 मिलियन प्रजातियां हैं। इसके अलावा, पानी के नीचे की सभी प्रजातियों में से 91 प्रतिशत और भूमि पर सभी प्रजातियों में से 86 प्रतिशत अभी तक खोज और वर्गीकृत नहीं किए गए हैं (समुद्री जीवन की जनगणना, 2011)। यहां तक ​​कि इन प्रजातियों में से कई को डरावनी के रूप में सूचीबद्ध किया जाता हैA प्रजातियों की एक और...

भूगोल और आप

– भारत में उष्णकटिबंधीय चक्रवात का पूर्वानुमान

उष्णकटिबंधीय चक्रवात, खासकर भारत के पूर्वी समुद्रतट पर, हमेशा से ही जानमाल के नुकसान के प्रमुख कारण रहे हैं। चक्रवात के पथ एवं उनके धरती पर पहुंचने का सटीक पूर्वानुमान, उसके रास्ते में पड़ने वाली तटीय आबादी को भारी राहत दे सकता है। उष्णकटिबंधीय चक्रवात के विश्लेषण एवं पूर्वानुमान में अवधारणात्मक, गतिकीय एवं सांख्यिकीय मॉडलों, मौसम वैज्ञानिक डाटा सेटों, प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता...

भूगोल और आप

भारत में जलवायु सेवाएं और इनके प्रबंधन उद्देश्य

मौसम संबंधी उग्र स्थितियाँ पूरे विश्व में लोगों को प्रभावित कर रही हैं। इनमें से कुछ घटनाओं की तीव्रता और बारंबारता (बार-बार घटित होना) में वृद्धि होने की संभावना रहती है और ये भविष्य के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं। इन समस्याओं को सामना करने का एक तरीका नई अल्प-कार्बन ऊर्जा एवं परिवहन प्रौद्योगिकियों का विकास कर ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) के उत्सर्जन को कम से कम करने के लिए त्वरित और...

भूगोल और आप

अपराध मानचित्रण के लिए जीआईएस अनुप्रयोग का उपयोग

भौगोलिक सूचना प्रणाली एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग स्थानिक डेटा को पढ़ने, संग्रह करने, संपादित करने, और विश्लेषण करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे यह कई अनुप्रयोगों के लिए एक व्यवहार्य उपकरण है। जीआईएस केवल एक उपकरण ही नहीं है बल्कि यह नीति निर्माताओं के लिए एक निर्णय समर्थन प्रणाली भी है क्योंकि यह अधिकारियों को किसी भी स्तर पर समस्याओं को समझने में मदद कर सकता है, चाहे यह देश...

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भारत की विश्वस्तरीय सुनामी चेतावनी प्रणालियाँ

लोगों के जीवन का नुकसान और छति को रोकने के उद्देश्य से सुनामियों का समय से पहले पता लगाने और समय पर चेतावनियाँ जारी करने के लिए एक सुनामी आरंभिक चेतावनी प्रणाली तैयार की गई है। सुनामी आरंभिक चेतावनी प्रणाली 2 घटकों को मिलाकर बनी है। सुनामियों का पता लगाने के लिए सेन्सरों का एक नेटवर्क और तटीय तथा निचले क्षेत्र में रहने वाले लोगों को समय पर स्थान खाली करने के लिए सामयिक चेतावनी का प्रसार...

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महाबलेश्वर स्थित एनएसीपीएल की मानसून विश्लेषण में उपयोगिता

हाई एल्टीट्यूड क्लाउड फिजिकल लेबोरेट्री, एचएसीपीएल की कल्पना किसी एक अवस्थिति में बादलों को लगातार मॉनीटर करने के लिए की गई थी जहाँ बादलों का आधार जमीन को छूता है। एचएसीपीएल के विचार को एक ही स्थान पर दीर्घावधि बादल भौतिकी गतिशीलता, विकिरण एवं रसायन विज्ञान प्रेक्षणों को प्राप्त करने के लिए मूर्त रूप दिया गया था क्योंकि विमान से किए गए प्रेक्षण स्व-स्थाने होते हैं और दैनिक तथा मौसमी...