भूगोल और आप

हिमालय में बर्फ पिघलने से अरब सागर में जहरीला ‘नोक्टिलुका सिंटिलैंस’ शैवाल की बहार

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ के उपग्रह से लिए गए तस्वीरों में अरब सागर के तटों पर ‘नोक्टिलुका सिंटिलैंस’, जिसे ‘सी-स्पार्कल’ भी कहा जाता है, की बहार देखी गई है। इन्हीं चित्रों के आधार पर एक अमेरिकी शोध प्रकाशित हुआ है जिसमें ‘नोक्टिलुका सिंटिलैंस बहार’ (Noctiluca scintillans blooms) को जलवायु परिवर्तन की वजह से हिमालय में बर्फ का पिघलना को जिम्मेदार ठहराया गया है। शोधकर्त्ताओं के अनुसार हिमालयन-तिब्बत...

भूगोल और आप

अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए क्या ‘क्लाइमेट एक्शन’ की बलि दी जाएगी?

पूरी दुनिया आज अभूतपूर्व दयनीय स्थिति का सामना कर रहा है। कोरोनवायरस संक्रमण पर काबू पाने के लिए लोगों को घर में ही रहने के आदेश से अधिकांश आर्थिक गतिविधियां थम सी गईं हैं। इसका परिणाम यह हुआ है कि करोड़ों लोगों पर बेरोजगारी का खतरा मंडराने लगा है, इनकी आय कम हो गई है या शून्य हो गई है तो दूसरी ओर सरकार को मिलने वाले राजस्व भी कम हो गये हैं। जाहिर है, पैंडेमिक का खतरा कम होने पर अर्थव्यवस्था...

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ऋणात्मक तेल मूल्य के क्या मायने हैं?

कल्पना कीजिए कि आप किसी दुकान पर जाते हैं और दुकानदार से एक चॉकलेट मांगते हैं जिसका मूल्य दस रुपये है। दुकानदार आपको मुफ्रत में चॉकलेट देता है, साथ में आपको पांच रुपये भी देता है। आपका हैरान होना स्वाभाविक है। आप यह सोचेंगे कि क्या ऐसा संभव है। वैसे वास्तविक दुनिया में तो यह संभव प्रतीत नहीं होता, परंतु अमेरिका में अप्रैल 2020 में कच्चा तेल के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। हम सबने कुछ दिन पहले पढ़ा...

भूगोल और आप

अभिशप्त कोविड-19 का ‘स्वच्छ वायु’ वरदान

एक ओर जहां आज कोरोनावायरस (सार्स- सीओवी-2) जनित कोविड-19 महामारी की वजह से मानव जगत की बड़ी आबादी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है, वहीं भारत में ‘सोशल डिस्टैंसिंग’ के आह्वान के बीच दिहाड़ी मजदूरों का ‘रिवर्स माइग्रेशन’ महामारी के भय पर भारी पड़ रहा है जो अपने आपमें एक बहुत बड़ी त्रासदी है। यह रिवर्स माइग्रेशन भी ‘मानव अस्तित्व के संकट’ से ही अंतर-संपर्कित है और यह आर्थिक अस्तित्व से...

भूगोल और आप

आपदा बचाव का पारितंत्र आधारित दृष्टिकोण

भारत तेजी से शहरी विस्तार के दौर से गुजर रहा है। बढ़ती आबादी, तीव्र विकास और आधारसंरचना विकास के साथ शहरी भारत आज आपदा के नए हॉटस्पॉट के रूप में उभरे हैं।

भूगोल और आप

आपदा प्रबंधन हेतु स्थानीय क्षमता वृद्धि की जरूरत

प्रभाव के दृष्टिकोण से किसी भी आपदा, प्राकृतिक या मानव जनित, का स्वरूप क्या होगा, बहुत हद तक स्थानीय समुदाय, राज्य व  राष्ट्रीय सरकारों द्वारा पूर्व में किये गए बेहतर प्रबंधन व उस अनुरूप कार्रवाई पर निर्भर करता है। दो उदाहरण इस कथन की पुष्टि कर देता है। फनी चक्रवात व पटना बाढ़। जहां फनी चक्रवात में आपदा प्रबंधन के कारण भारत सरकार व ओडिशा राज्य सरकार को वैश्विक स्तर पर प्रशंसा प्राप्त...

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‘जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन’ पर सम्मेलन

अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस 2019 की पूर्व संध्या पर  राजधानी दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में ‘जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन’ पर एक सम्मेलन आयोजित हुआ। इसे अंतरराष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (आईआईडीएम) ने आयोजित किया था। सम्मेलन में आपदा प्रबंधन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विशेषज्ञों ने अपनी राय व अनुभव साझा किए। यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ जब पटना शहर भीषण बाढ़...

भूगोल और आप

झंझावात-क्या है इसके पीछे का विज्ञान?

आए दिन हम अखबारों में झंझावात (थंडरस्टॉर्म), बिजली गिरने से लोगों की मौत जैसी खबरें पढ़ते हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली गिरने से होने वाली मौत की कुछ ज्यादा ही खबरें आती हैं। क्या आप जानते हैं कि जमीन पर ये बिजलियां कैसे गिरती हैं और इसके पीछे का विज्ञान क्या है? झंझावात के विज्ञान को समझने के लिए हमें बिजली गिरने व गर्जन के विज्ञान को समझना होगा। आईए जानते हैं इसके पीछे के विज्ञान...

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माउंट एवरेस्ट पर इतनी भीड़ एवं दुर्घटना क्यों?

इस बार के सीजन में दुनिया के सबसे ऊँचे पहाड़ माउंट एवरेस्ट पर इतने लोग चढ़ने आ गए कि जाम लग गया। उस जाम के कारण दुर्घटना हुयी और 11 लोग मारे गए .उनमे २ भारतीय भी हैं । 4 दिन पहले एक ही दिन 250 से जयादा लोग एवरेस्ट शिखर पर चढ़ने के लिए लाइन लगाए हुए थे। ये जाम लगने की घटनाये पहले भी हुयी हैं 1953 में जब एडमंड हिलेरी एवं तेनजिंग नोरगे एवरेस्ट के शिखर पर चढे थे तो उन्होनंे सोचा नहीं होगा कि उनके इस अभियान...

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चंद्रमा के डार्क साइड पर चीनी अंतरिक्ष मिशन

नव वर्ष 2019 की शुरुआत के साथ ही पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा ने ‘चांग ए-4‘ (Chang’e 4) नामक एक नए अतिथि का स्वागत किया। परंतु यह अतिथि इस रूप में भिन्न था कि इसने चंद्रमा के उस हिस्सा पर अपने कदम रखे जहां आज तक कोई मानव अंतरिक्ष यान नहीं पहुंच सका। हालांकि पूर्व में प्रयास जरूर किए गए परंतु सफलता नहीं मिली। दरअसल इस बार चंद्रमा के तथाकथित ‘डार्क साइड’ पर कोई रोवर चहलकदमी करने में...