भारत के राज्यों में प्रादेशिक नियोजन एवं द्वीपीय क्षेत्रों का विकास

भारत के द्वीपीय क्षेत्रों में प्रादेशिक नियोजन एवं विकास

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Description

लक्ष्यद्वीप में  प्रादेशिक नियोजन के अंतर्गत सामुदायिक ग्रामीण विकास का प्रारंभ 1971 में हुआ जिसके तहत 4 सामुदायिक ब्लाकों का निर्माण किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को स्वयं विकास के लिए योजना निर्माण एवं कार्यान्वयन के लिए प्रशिक्षित करना था। लगभग सभी आर्थिक गतिविधियों के सुचारू रूप से संचालन के लिए प्रादेशिक नियोजन हेतु लक्ष्यद्वीप में 1962 में सहकारी पद्धति लागू की गई उदाहरण के लिए द्वीप के 100 प्रतिशत नारियल उत्पाद का सहकारी प्रणाली के तहत विपणन होता है।

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