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भूजल का संरक्षण और जलभरों का बचाव

विभिन्न स्तरों पर भूजल की मात्रा व गुणवत्ता के संरक्षण की आवश्यकता है। इसके लिए भूजल के दोहन की सीमा, वर्तमान जलभरों को रिचार्ज करना, खारा जल प्रवेश, प्रदूषित सीवेज और औद्योगिक कचरों द्वारा हो रहे प्रदूषित जल को रोकने की आवश्यकता है।

यह निश्चित है कि शहरी आबादी की आवश्यकता पूर्ति हेतु जल की मांग बढ़ने से भूजल संसाधनों पर दबाव पड़ता है। चूंकि भूजल के निष्कासन को रोकना संभव नहीं है, इसलिए हमें निष्कासन की सीमा के तरीकों को खोजना होगा। जिन क्षेत्रों में मध्यम से लेकर भारी वर्षा होती है वहां वर्षा जल संचयन और रिचार्ज के मॉडल बेहतर समाधान साबित हो सकते हैं।

देश के उन अन्य भागों में जहां वर्षा कम मात्रा में होती है, वहां वर्षा जल संचयन पर्याप्त नहीं है। वहां उपलब्ध जल का पुनर्चक्रण आवश्यक है जिससे भूजल निष्कासन को न्यूनतम रखा जा सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां कृषि के लिए जल का निष्कासन अत्यधिक मात्रा में होता है, वहां ऐसी फसलें उगाई जानी चाहिए जो मिट्टी की गुणवत्ता और भौगोलिक क्षेत्र के अनुकूल हों जिससे भूजल के अत्यधिक दोहन को सीमित किया जा सके। अर्ध शुष्क, शुष्क या ऊपरी क्षेत्रों में चावल और गेहूं के स्थान पर बाजरा को उगाया जा सकता है।

इसी प्रकार, तटीय क्षेत्रों में जहां जल का जमाव रहता है। वहां यूकेलिप्ट्स पेड़ों को लगाने से समस्या का समाधान हो सकता है, और मिट्टी भी वर्ष भर फसलों के उगाने के अनुकूल हो जाती है। चावल या गेहूँ की गहन खेती के तरीकों से जल के उपभोग को कम करके बेहतर उपज ली जा सकती है। उर्वरकों से निकलने वाले रसायनों से ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है।

जैविक खेती के प्रचलन से स्वास्थ्य के अनुकूल खाद्य पदार्थों को उगाया जा सकता है। इस तरीके से की गई खेती से भूजल के विषैले होने का खतरा भी कम रहता है। स्वच्छता की अपर्याप्त सुविधाएं, अनुपचारित सीवेज और प्रदूषकों के कारण भी जल प्रदूषित होता है। अनुपचारित औद्योगिक कचरों से न केवल मिट्टी नष्ट हो सकती है बल्कि खाद्य चक्र में केडमीयम जैसे खतरनाक प्रदूषक प्रवेश कर सकते हैं, जैसा बंगाल के डेल्टा क्षेत्रों में हुआ है।

इसलिए भूजल के प्रदूषण को रोकने के लिए पर्यावरण की स्वच्छता को अपनाया जाना बचाव का एक बेहतर तरीका है। गंगा बेसिन के निचले भागों में डेल्टा क्षेत्र में भी भूजल स्रोतों का आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रदूषण एक सामान्य सी बात है। आमतौर पर, भूजल का अत्यधिक दोहन और इसका निरंतर निष्कासन का कारण बढ़ती जा रही जनसंख्या है।

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