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वीडल सील द्वारा चुम्बकीय क्षेत्र का जीपीएस रूप में प्रयोग

वीडल सील मछलियों में एक प्रकार का जैविक अनुकूलन करने की क्षमता होती है जिससे वे समुद्र की गहराई तक गोता लगा सकती हैं। साथ ही उनमें एक अनोखी योग्यता भी होती है जिससे सीलें बर्फीली सतहों में भी अपनी जरूरत के अनुसार छिद्र तलाश लेती हैं और इन छिद्रों  को सांस लेने के लिए उपयोग करती हैं। शोधकर्ता मानते हैं कि वीडल सील मछलियां पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को प्राकृतिक जीपीएस के रूप में प्रयोग करते हुए ऐसा करती हैं।

टेक्सॉस की ए एण्ड एम यूनिवर्सिटी  के जलीय जैविक विभाग में कार्यरत रेंडॉल डेविस के अनुसार, यह जीव किसी प्रकार की चुंबकीय संवेदना के साथ विकसित हुआ है जो कि दिशा के ज्ञान में इनकी बहुत सहायता करती है। इसकी सहायता से वीडल सील मछलियां कुछ दूरी पर स्थित बर्फ छिद्रों को ढूंढ लेती हैं तथा बाद में आवश्यकता होने पर भी सुरक्षित उन तक वापिस पहुंच जाती हैं।

पोर्ट अरान्सास में स्थित मरीन साइंस इंस्टीट्यूट जो टेक्सास यूनिवर्सिटी से संबंधित है इसमें कार्यरत सहायक निदेशक ने वीडल सील के व्यवहार का कई दशकों तक अध्ययन किया है।

1990 के बाद के वर्षों में जब टीम ने साथ मिलकर अंटार्कटिका में काम किया तो इस बात का अंदाजा लगाया गया कि वीडल सील बिना किसी गलती के चुंबकीय रेखाओं का अनुसरण कर सकती है।

फ्यूमन भी प्रारंभिक आंकड़ों से अचंभित हुए। बिल्कुल शुरुआती आंकड़ों से पता चला कि वीडल सील गजब की विशुद्धता के साथ गोता लगाने वाले छिद्रों पर वापस पहुंच रही थी।

हर जीव पर अलग से एक वीडियो और डाटा रिकार्डर कुछ हफ्तों के लिए तीन अलग-अलग इलाकों के रास्तों पर मकमरडों साउंड में छोड़ा गया शोधकर्ताओं ने चुंबकीय क्षेत्र का विशुद्धता से मैप तैयार किया।

फ्यूमन कहते हैं “जब एक जीव अलग-अलग चुंबकीय क्षेत्रों से गुजरता है तो उसके व्यवहार में बदलाव होना चाहिए”।

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