‘भूगोल और आप’ पर्यावरण और विकास पर हिंदी माध्यम में सर्वश्रेष्ठ मासिक पत्रिका है। यह पत्रिका भूगोल, पर्यावरण, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, सामाजिक मुद्दों, विकासात्मक मुद्दों जैसे व्यापक क्षेत्रों के समसामयिक विषयों पर विशेषज्ञों एवं शोधकर्त्ताओं के अनुप्रयोगी अनुभवों को पाठकों से साझा करती है, जिनका हिंदी माध्यम में सर्वथा अभाव है। यह पत्रिका दो दशकों की सफल यात्रा तय कर चुकी है। प्रिंट एवं डिजिटल संस्करण के माध्यम से ‘भूगोल और आप’ प्रतिमाह एक लाख से अधिक पाठकों तक पहुंचती है।

विशेषांक

‘भूगोल और आप’ हिंदी माध्यम में मानक सूचना तक पहुंच की आवश्यकता की महत्ता को भलीभांति समझती है। इसी परिप्रेक्ष्य में इस पत्रिका की परिकल्पना भी की गई थी। शोधपरक प्रासंगिक एवं अनुप्रयोगी विषयों के समावेशन एवं साझा करने की अपनी परंपरा को जारी रखते हुए हम वर्ष 2011 के पश्चात भूगोल और आप ई-पत्रिका के कुछ आलेख यहां निःशुल्क साझा कर रहे हैं। हमें आशा है कि ये आलेख आपके लिए अधिक उपयोगी सिद्ध होंगे। पढने का आनंद लें और अपनी जानकारी समृद्ध करें। संपादक-भूगोल और आप।

नवीनतम अंक

‘भूगोल और आप’ का नवीनतम अंक (मई-जून 2020 संयुक्त), जिसका शीर्षक है ‘सागरों के प्रहरी’, भारत की विशाल तटरेखा के लिए सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने में ‘पृथ्वी प्रणाली विज्ञान संगठन-भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (ईएसएसओ-इंकॉइस)’ के कार्याें को प्रकाश में लाता है। ईएसएसओ-इंकॉइस प्रेक्षण, पूर्वानुमान, महासागरीय शोध, आपदा उपशमन, तटीय भेद्दता को सहने लायक बनाने हेतु सूचना साझा करना, तटीय मछुआरा समुदायों जैसे बहु-संकाय निकायों के माध्यम से भारतीय तटीय समुदाय का मदद कर रहा है। यह विशेषांक इस संस्थान द्वारा नियोजित विभिन्न क्षमताओं, अनुभवों एवं प्रौद्योगिकी का विस्तृत विश्लेषणात्मक विवरण प्रस्तुत करता है जो इसे विविध लक्ष्यों की प्राप्ति और भारतीय तटरेखा के प्रहरी की भूमिका निभाने में मदद करती है।


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